

US Supports Pakistan Afghanistan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए अफगानिस्तान में की गई उसकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया है।
वॉशिंगटन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान को आतंकवादियों से खुद को बचाने का पूरा अधिकार है। इस समर्थन ने दक्षिण एशिया के इन दो पड़ोसी मुल्कों के बीच चल रहे संघर्ष को एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी जनता ने आतंकवाद के कारण बहुत नुकसान झेला है। वॉशिंगटन ने अफगानिस्तान पर किए गए हमलों की तरफदारी करते हुए संकेत दिया कि वह पाकिस्तान द्वारा उठाए गए कदमों को 'आत्मरक्षा' का हिस्सा मानता है।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका का यह रुख इस ओर भी इशारा करता है कि वह अफगान तालिबान को एक आतंकवादी गुट के रूप में देखता है। इसके अतिरिक्त, पाकिस्तान का अमेरिका के लिए एक 'प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी' होना भी इस समर्थन का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
हालिया संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब 27 जून को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पकतीका, नंगरहार और खोस्त प्रांतों में हवाई हमले किए। संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस एयरस्ट्राइक में कम से कम 28 आम नागरिक मारे गए और लगभग 49 लोग घायल हुए हैं।
हालांकि, पाकिस्तान का दावा है कि उसकी सेना ने केवल आतंकवादियों के हथियारों और गोला-बारूद के भंडारों को ही नष्ट किया है। जवाबी कार्रवाई में अफगान सेना ने भी पाकिस्तानी सीमावर्ती इलाकों पर हमले शुरू कर दिए, जिससे स्थिति और भी विस्फोटक हो गई है।
इस सैन्य तनाव के पीछे की मुख्य वजह कराची में हुआ हमला बताया जा रहा है। सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर हुए एक हमले में पाकिस्तान के तीन जवान शहीद हो गए थे। पाकिस्तान ने इस हमले का जिम्मेदार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े गुट 'जमात-उल-अहरार' को ठहराया और इसके जवाब में अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर एयरस्ट्राइक की।
इस्लामाबाद लंबे समय से अफगानिस्तान पर उन मिलिटेंट्स को पनाह देने का आरोप लगाता रहा है जो पाकिस्तान में अस्थिरता फैला रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन सूत्रों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा व्हाइट हाउस लौटने के बाद से वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के रिश्तों में काफी सुधार आया है। पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी संघर्ष को सुलझाने में एक मध्यस्थ की भूमिका भी निभाई है, जिससे अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंध और मजबूत हुए हैं।
दूसरी ओर, अफगान तालिबान ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि आतंकवाद पाकिस्तान की अपनी आंतरिक समस्या है और वह अपनी सुरक्षा विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ रहा है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है और तालिबान ने पाकिस्तान से इस हमले का बदला लेने की कसम खाई है।