US का MQ-4C ड्रोन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Us Navy Drone MQ4C Crash Persian Gulf: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। 9 अप्रैल 2026 को अमेरिकी नौसेना का सबसे अत्याधुनिक और महंगा ड्रोन, MQ-4C ट्राइटन (MQ-4C Triton) फारस की खाड़ी में एक खुफिया मिशन के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में गिरकर लापता हो गया है। इस घटना ने न केवल रक्षा विशेषज्ञों को चौंका दिया है बल्कि पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा तेज कर दी है कि क्या इसे ईरान द्वारा मार गिराया गया है।
हादसे के समय यह ड्रोन Strait of Hormuz के पास एक निगरानी मिशन पर था। उड़ान के दौरान अचानक ड्रोन से अंतरराष्ट्रीय इमरजेंसी कोड ‘7400’ (कम्युनिकेशन लिंक लॉस) और फिर ‘7700’ (जनरल इमरजेंसी) रिलीज हुआ। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह ड्रोन मात्र 10 मिनट के भीतर 52,000 फीट (लगभग 12 हजार मीटर) की ऊंचाई से गिरकर 9,500 फीट पर आ गया और फिर रडार से पूरी तरह गायब हो गया। अभी तक इस 1856 करोड़ रुपये की कीमत वाले ड्रोन का कोई मलबा नहीं मिला है।
नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन द्वारा निर्मित MQ-4C ट्राइटन अमेरिकी नौसेना का ‘हाई अल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस’ (HALE) ड्रोन है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
अभी तक न तो अमेरिका ने और न ही ईरान ने इस पर कोई आधिकारिक बयान दिया है। हालांकि, विशेषज्ञ तीन मुख्य संभावनाएं जता रहे हैं:
तकनीकी खराबी: ड्रोन के इंजन या सैटेलाइट कम्युनिकेशन लिंक में अचानक आई गड़बड़ी।
इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर: रूस और चीन की मदद से ईरान ने विकसित किए गए अपने मजबूत जैमिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर ड्रोन के सिग्नल बाधित किए हों।
मिसाइल हमला: हालांकि किसी मिसाइल लॉन्च के सबूत नहीं मिले हैं लेकिन 2019 में ईरान इसी इलाके में एक अमेरिकी ग्लोबल हॉक ड्रोन को मार गिरा चुका है।
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होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। इतने महंगे और सक्षम ड्रोन का गायब होना अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है। यदि यह साबित होता है कि ईरान ने जैमिंग या किसी अन्य माध्यम से इसे गिराया है तो क्षेत्र में पहले से जारी युद्ध की आग और भड़क सकती है। फिलहाल अमेरिकी नौसेना इस मामले की गहन जांच कर रही है।