डोनाल्ड ट्रम्प और अयातुल्लाह खामेनेई (सोर्स-AI डिज़ाइन)
Donald Trump support for Iran freedom: ईरान में गिरती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ जन-आक्रोश अब एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह में बदल चुका है, जिससे इस्लामिक गणराज्य की नींव हिल गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष के बीच प्रदर्शनकारियों को अपना खुला समर्थन देते हुए कहा है कि अमेरिका उनकी आजादी की लड़ाई में मदद के लिए पूरी तरह तैयार है।
पिछले दो हफ्तों में भड़की हिंसा में 70 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य हस्तक्षेप की अटकलें तेज हो गई हैं। तेहरान के बाजारों से उठी यह आवाज अब ईरान के सभी 31 प्रांतों और 100 से अधिक शहरों में गूंज रही है, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो रहे हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट संदेश दिया है कि ईरान के लोग अब पहले से कहीं अधिक मजबूती के साथ आजादी की मांग कर रहे हैं। उनके इस बयान ने वैश्विक मंच पर उन कयासों को हवा दे दी है कि अमेरिका जल्द ही खामेनेई सरकार के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू कर सकता है। ट्रंप की इस आक्रामक मुद्रा ने तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कूटनीतिक संबंधों को एक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
ईरान में प्रदर्शनों का मुख्य कारण वहां की मुद्रा ‘रियाल’ की भारी गिरावट है, जो अब डॉलर के मुकाबले 14 लाख के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। तेहरान के दुकानदारों ने आर्थिक तबाही और बढ़ती लागत के खिलाफ जो मोर्चा खोला था, वह अब धार्मिक शासन के खिलाफ एक राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। आम जनता का दावा है कि वर्तमान सरकार के तहत देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है और उनका जीवन संकट में है।
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अपने देश के आंतरिक मामलों पर ध्यान देने की सलाह दी है। खामेनेई ने ट्रंप को एक ‘तानाशाह’ करार देते हुए चेतावनी दी है कि उनका हश्र भी ईरान के पूर्व शाह जैसा ही होगा, जो देश छोड़कर भागने पर मजबूर हुए थे। दोनों नेताओं के बीच जारी यह जुबानी जंग अब सैन्य तनाव में तब्दील होती दिख रही है, जिससे मध्य पूर्व की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने भी सड़कों पर उतरे लोगों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक का पुरजोर विरोध करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से अपील की है कि वे ईरानी नागरिकों को इस अत्याचारी शासन से मुक्ति दिलाने के लिए हर संभव सैन्य और कूटनीतिक सहायता प्रदान करें। इस आह्वान ने देश के भीतर छिपे विद्रोहियों और प्रदर्शनकारियों को नई ऊर्जा दी है, जिससे हिंसा और अधिक बढ़ने की आशंका है।
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ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, पिछले 14 दिनों के भीतर हुए संघर्षों में कम से कम 72 निर्दोष लोग मारे गए हैं और 2,300 से अधिक लोग हिरासत में हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी साफ कर दिया है कि अमेरिका कोई खेल नहीं खेल रहा है और ट्रंप अपनी चेतावनियों को अमल में लाने के लिए जाने जाते हैं। पूरे देश में इंटरनेट पाबंदियों के बावजूद लोगों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है और वे निर्णायक लड़ाई के लिए सड़कों पर डटे हुए हैं।
I hope people now understand. The President of the United States is not a game player. When he tells you he’s going to do something and address a problem, he means it. pic.twitter.com/bVhtqcoPWP — Secretary Marco Rubio (@SecRubio) January 3, 2026