अमेरिका-इजराइल का ईरान पर हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Joint Military Combat Operations In Iran: दुनिया के नक्शे पर इस समय महायुद्ध की काली छाया साफ तौर पर दिखाई दे रही है क्योंकि मिडिल ईस्ट जंग की आग में झुलस रहा है। शनिवार 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई शहरों पर ताबड़तोड़ मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से हमला किया। इस साझा सैन्य ऑपरेशन को ‘एपिक फ्यूरी’ और ‘लायन रोर’ का नाम दिया गया है जिसमें तेहरान सहित कई रणनीतिक ठिकानों को ढहा दिया गया।
इजराइल की वायु सेना ने बताया कि करीब 200 लड़ाकू विमानों ने ईरान के मध्य भाग में स्थित 500 ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। ईरानी रेड क्रिसेंट के आंकड़ों के अनुसार इन हमलों में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 700 से ज्यादा घायल हैं। सबसे दुखद खबर मीनाब शहर के एक लड़कियों के स्कूल से आई है जहां बमबारी की वजह से 85 मासूम छात्राओं की जान चली गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट लिखकर दावा किया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब नहीं रहे। इजराइली मीडिया का कहना है कि खामेनेई का शव मिल गया है लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इन खबरों को पूरी तरह से मानसिक युद्ध बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि उनके सर्वोच्च नेता और राष्ट्रपति पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे जल्द ही देश को संबोधित करेंगे।
ईरान ने भी चुप न बैठते हुए जवाबी कार्रवाई में इजराइल की ओर करीब 125 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं जिससे तेल अवीव में सायरन बज रहे हैं। इसके साथ ही ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी बेस को भी निशाना बनाया है जिसके बाद दुबई एयरपोर्ट सहित कई हवाई मार्ग बंद कर दिए गए। विमानन मंत्रालय के अनुसार शनिवार को 410 उड़ानें रद्द हुईं और रविवार 1 मार्च को भी 444 उड़ानों के रद्द होने की संभावना जताई जा रही है।
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अमेरिका के भीतर ही उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने ट्रंप की इस कार्रवाई का विरोध करते हुए इसे सैनिकों को खतरे में डालने वाला युद्ध कहा है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव और रूस ने इस सैन्य तनाव की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती है।