डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Us Iran Peace Talks Islamabad Trump Warning: दुनिया इस समय एक बेहद विरोधाभासी स्थिति की गवाह बन रही है। एक तरफ पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल शांति की तलाश में मेज पर बैठे हैं, तो दूसरी तरफ समुद्र के भीतर बारूद की गंध तेज हो गई है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अमेरिकी नौसेना और ईरानी बलों के बीच सीधा टकराव होने की खबर सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, अमेरिका के कई युद्धपोतों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने का प्रयास किया जिससे क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरानी नौसेना ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए खुली चेतावनी जारी की है कि यदि इन युद्धपोतों को 30 मिनट के भीतर नहीं रोका गया तो उन्हें मिसाइलों से उड़ा दिया जाएगा।
विशेष रूप से, ईरानी नौसेना ने फुजेराह के पास मौजूद अमेरिकी डिस्ट्रॉयर ‘यूएसएस माइकल मर्फी’ (USS Michael Murphy) को तुरंत वापस जाने की चेतावनी दी है।
ईरान की इस आक्रामक चेतावनी से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक निर्णायक बयान जारी किया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब हॉर्मुज जलमार्ग को ‘साफ’ करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। उन्होंने इसे चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों के लिए एक ‘बड़ी मदद’ करार दिया जो अपनी तेल आपूर्ति के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।
ट्रंप ने इन देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनमें स्वयं इस मार्ग को सुरक्षित रखने का साहस नहीं है। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान को एक ‘नाकाम देश’ (Failed Nation) बताकर तनाव को और बढ़ा दिया है।
समुद्र में जारी इस उबाल के बीच, इस्लामाबाद के सुरक्षित गलियारों में कूटनीति का दौर भी जारी है। साल 2015 के बाद यह पहली बार है जब दोनों कट्टर प्रतिद्वंद्वी एक-दूसरे के आमने-सामने बैठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अपनी 10 सूत्रीय मांगें पेश की हैं, जबकि अमेरिका 15 सूत्रीय एजेंडे के साथ वार्ता में शामिल हुआ है।
पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। शुरुआती दो घंटे की सीधी बातचीत के बाद फिलहाल वार्ता में ब्रेक लिया गया है लेकिन हॉर्मुज की स्थिति इस शांति प्रक्रिया को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
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अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का दावा है कि उनके जहाज शनिवार को बिना किसी ईरानी तालमेल के हॉर्मुज से गुजरे हैं। यह कदम वैश्विक तेल बाजार के लिए खतरे की घंटी है क्योंकि किसी भी सैन्य चूक से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति ठप हो सकती है। ट्रंप के तीखे तेवरों और ईरान की ‘उड़ा देने’ की धमकी के बीच दुनिया अब सांसें थामकर देख रही है कि क्या इस्लामाबाद की शांति की मेज इस महायुद्ध को टाल पाएगी।