अमेरिका ईरान तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran Talks In Oman Hindi News: वैश्विक तनाव और मध्य-पूर्व में युद्ध की बढ़ती आशंकाओं के बीच अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में आमने-सामने की सीधी बातचीत शुरू कर दी है। यह वार्ता ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की खुली चेतावनी दी है और फारस की खाड़ी में युद्धपोतों का एक विशाल बेड़ा तैनात कर दिया है।
जून 2025 के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि एक ही मेज पर बैठे हैं। पिछले साल जून में इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद हुई जवाबी हवाई कार्रवाइयों के कारण बातचीत का सिलसिला पूरी तरह टूट गया था। अब, ओमान की मध्यस्थता में यह उच्च-स्तरीय वार्ता फिर से शुरू हुई है जिसे तेहरान के पास अमेरिकी सैन्य हमले और अपने परमाणु कार्यक्रम पर स्ट्राइक को टालने का अंतिम अवसर माना जा रहा है।
बातचीत का माहौल काफी तनावपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने अपने देश में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को मारना बंद नहीं किया तो अमेरिका हमला करेगा। उन्होंने दावा किया कि खाड़ी में मौजूद अमेरिकी अर्माडा वेनेजुएला के नेता को हटाने के लिए भेजे गए कार्यबल से भी बड़ा है। हाल ही में, अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी ‘शाहेद-139’ ड्रोन को भी मार गिराया था जो अरब सागर में अमेरिकी विमान वाहक पोत ‘अब्राहम लिंकन’ के बेहद करीब आ गया था।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा है कि ईरान खुली आंखों और अच्छी भावना के साथ वार्ता में शामिल हो रहा है लेकिन वह अपने अधिकारों पर अडिग रहेगा। ईरान का जोर इस बात पर है कि यह बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक ही सीमित रहे। इसके विपरीत, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का रुख कड़ा है। उनका कहना है कि इस वार्ता में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय आतंकी संगठनों को उसका समर्थन और ईरानी नागरिकों के साथ किए जा रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन को भी शामिल किया जाना चाहिए।
यह वार्ता ईरान में हुए भीषण हिंसा को लेकर रही है। मानवाधिकार समूहों के अनुसार, पिछले महीने हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोग मारे गए हैं। 8 जनवरी को इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान हुई हिंसा की ऐसी गवाहियां सामने आ रही हैं जहां सुरक्षा बलों ने बच्चों और बुजुर्गों तक पर गोलियां चलाईं।
यह भी पढ़ें:- रूसी जनरल व्लादिमीर अलेक्सेयेव पर मॉस्को में फायरिंग, हालत नाजुक; रक्षा महकमे में मचा हड़कंप
ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अल्बुसैदी ने उम्मीद जताई है कि यह वार्ता दोनों देशों के बीच एक स्थायी मार्ग निकालेगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मस्कट पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस सैन्य टकराव को टाल पाएगी।