
टाइम्स स्क्वायर में सीजेआई गवई के खिलाफ प्रदर्शन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Protest Against CJI Gavai in US: अमेरिका के न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में हिंदू प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने एक डिजिटल बिलबोर्ड अभियान और जनसभा का आयोजन किया, जिसका मकसद भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की हालिया सुनवाई में की गई टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त करना था। इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन स्टॉप हिंदू जेनोसाइड द्वारा किया गया।
समुदाय ने 8 नवंबर को सीजेआई गवई को संबोधित एक खुला पत्र लिखा। पत्र में 16 सितंबर को हुई सुनवाई का जिक्र था, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन खजुराहो मंदिर स्थल पर भगवान विष्णु की ऐतिहासिक मूर्ति को पुनर्स्थापित करने के लिए दायर याचिका पर विचार किया गया। सुनवाई के दौरान, सीजेआई ने कथित तौर पर याचिकाकर्ता को प्रार्थना के माध्यम से ईश्वरीय हस्तक्षेप मांगने का सुझाव दिया। कुछ लोगों ने इसे हिंदू धार्मिक मान्यताओं के प्रति असंवेदनशील माना।
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दैरान कथित तौर पर कहा था कि, “जाओ और देवता से ही कुछ करने के लिए कहो। तुम कहते हो कि तुम भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हो। तो जाओ और अभी प्रार्थना करो। यह एक पुरातात्विक स्थल है और एएसआई को इसकी अनुमति देनी होगी।” इस टिप्पणी को लेकर समुदाय ने औपचारिक माफी की मांग की।
न्यूयॉर्क, अमेरिका वैश्विक हिंदू प्रवासी समुदाय ने न्यूयॉर्क शहर के प्रसिद्ध टाइम्स स्क्वायर पर भारत के हिंदू-विरोधी मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायाधीशों का पर्दाफाश किया। टाइम्स स्क्वायर के एक विशाल बिलबोर्ड पर उनके सिर पर जूता फेंका गया था और दुनिया भर के हिंदुओं से माफ़ी… pic.twitter.com/Hhmdroax1p — Ocean Jain (@ocjain4) November 10, 2025
यह कार्यक्रम 8 नवंबर को डफी स्क्वायर में शुरू हुआ और कथित तौर पर 12 नवंबर तक चला। आयोजकों ने इसे हिंदू धार्मिक भावनाओं के प्रति कथित असंवेदनशीलता बताया। खुला पत्र केवल सीजेआई तक सीमित नहीं था। इसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, यूयू ललित, सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय एस ओका और मुख्य न्यायाधीश मनोनीत न्यायमूर्ति सूर्यकांत सहित अन्य न्यायाधीशों की पिछली टिप्पणियों और फैसलों पर भी सवाल उठाया गया।
मार्च में डिजिटल होर्डिंग लगाई गई, जिनमें हिंदुओं के प्रति सम्मान और जवाबदेही की अपील की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से हिंदू प्रवासी भारतीय और हिंदू अमेरिकी शामिल थे। उन्होंने बैनर और संदेशों के जरिए न्यायालय के कई फैसलों को दिखाया और बताया कि इन मामलों में सांस्कृतिक और धार्मिक संदर्भों को ज्यादा ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसके अलावा, पत्र में त्योहारों की परंपराओं, मंदिरों के प्रबंधन पर लगाए गए प्रतिबंध और अन्य फैसलों के उदाहरण दिए गए। प्रतिभागियों का कहना था कि ये मुद्दे संवैधानिक अधिकारों, खासकर अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी से टकराव करना नहीं है, बल्कि सुधार लाना है।






