
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Exits 66 International Organizations: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि पारंपरिक बहुपक्षवाद का दौर अब आधिकारिक तौर पर समाप्त हो चुका है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने का निर्णय लिया है, जिन्हें उन्होंने अमेरिकी संप्रभुता और हितों के खिलाफ बताया है। विदेश विभाग के अनुसार, इन संगठनों की कार्यप्रणाली अपारदर्शी, खर्चीली और नैतिक रूप से कमजोर है, जो अमेरिकी करदाताओं के धन का दुरुपयोग करती है। यह कदम वैश्विक कूटनीति में अमेरिका के ‘अमेरिका फर्स्ट’ दृष्टिकोण को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
मार्को रूबियो के अनुसार, वर्तमान अंतरराष्ट्रीय प्रणाली सैकड़ों ऐसे संगठनों से भरी पड़ी है जिनके दायित्व एक-दूसरे से टकराते हैं और नतीजे बेहद कमजोर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय नौकरशाहियों को बिना शर्त फंड देने का दौर अब बीत चुका है और अमेरिका केवल उन्हीं मंचों का हिस्सा रहेगा जो जवाबदेह हैं। इन संगठनों के चयन के लिए एक लंबी समीक्षा प्रक्रिया अपनाई गई थी जिसमें उनकी दक्षता और अमेरिकी हितों को परखा गया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ज्ञापन जारी कर उन संगठनों से हटने को औपचारिक रूप दिया है जो अमेरिका की स्वतंत्रता और समृद्धि के मार्ग में बाधा उत्पन्न कर रहे थे। प्रशासन का मानना है कि ये संस्थान अक्सर ऐसे बाहरी हितों के प्रभाव में काम करते हैं जो अमेरिकी मूल्यों के बिल्कुल विपरीत हैं। रूबियो ने तर्क दिया कि अमेरिका की निरंतर भागीदारी इन विफल मॉडलों को अवांछित वैधता प्रदान करती है।
विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कई प्रमुख संगठनों की तीखी आलोचना करते हुए उन्हें नैतिक रूप से विफल बताया है। उन्होंने यूएन पॉपुलेशन फंड पर विवादास्पद वित्तपोषण और यूएन वीमेन पर अपनी मूल परिभाषाओं से भटकने का गंभीर आरोप लगाया है। रूबियो का दावा है कि इन संस्थानों का रिकॉर्ड लगातार विफलताओं से भरा है और वे वैश्विक समस्याओं के समाधान में सहायक नहीं हैं।
जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन पर निशाना साधते हुए रूबियो ने इसे ‘क्लाइमेट अलार्मिस्ट’ और ऊर्जा-विरोधी निवेश को बढ़ावा देने वाला तंत्र बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान पश्चिमी तट और गाजा जैसे क्षेत्रों में लाखों डॉलर खर्च कर रहे हैं, जो किफायती ऊर्जा और आर्थिक विकास के खिलाफ है। अमेरिका अब ऐसी किसी भी नीति का समर्थन नहीं करेगा जो उसकी ऊर्जा स्वतंत्रता और आर्थिक विकास की गति को धीमा करती हो।
यह भी पढ़ें: ट्रंप को ‘अंधेरे’ में रखा PAK! अमेरिकी थिंक टैंक ने खोली शहबाज-मुनीर की पोल, बताया क्यों खतरनाक है यह दोस्ती
अमेरिकी विदेश विभाग ने साफ कर दिया है कि दुनिया भर के लोग अमेरिका से बेहतर नेतृत्व की उम्मीद करते हैं और वे इसके हकदार भी हैं। रूबियो के अनुसार, यह कदम केवल बाहर निकलने के बारे में नहीं है, बल्कि कूटनीति के एक नए और प्रभावी युग की शुरुआत है। अमेरिका अब वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों और राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए अन्य देशों और संस्थाओं के साथ जुड़ाव रखेगा।






