ट्रंप का ‘इकोनॉमिक टॉर्चर’! न उड़ेगा विमान, न बिकेगा तेल; अमेरिका ने ईरान के चारों तरफ खींची तबाही की लकीर
US ban Iranian Airlines: अमेरिका ने ईरान की एयरलाइन्स पर बैन लगा दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने इसे आर्थिक आक्रोश अभियान का हिस्सा बताया, जबकि ईरान ने इसे देश को नुकसान पहुंचाने वाली साजिश बताया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
मोजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US ban Iranian Airlines In Middle East Crisis: मीडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों के बीच एक बार फिर तनाव की चिंगारी भड़क उठी है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा आर्थिक प्रहार करते हुए उसकी सभी एयरलाइन्स पर बैन की घोषणा कर दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच कूटनीतिक स्तर पर शांति की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अचानक हुए हमलों ने क्षेत्र को फिर से युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने दी चेतावनी
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने X पर जारी एक पोस्ट में बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी शासन के खिलाफ अपना ‘आर्थिक आक्रोश अभियान’ और तेज कर रहा है। बेसेंट के अनुसार, ईरानी अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा का पतन तेजी से हो रहा है, जिसका असर यह है कि वहां के सैनिकों को वेतन नहीं मिल रहा है और पुलिस प्रशासन भी काम पर आने से कतरा रहा है।
नए प्रतिबंधों के तहत अब ईरानी एयरलाइनों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लैंडिंग स्पॉट, विमानों में ईंधन भरने और टिकटों की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही, अमेरिकी नौसेना ने खारग द्वीप की नाकेबंदी कर दी है, जिससे ईरानी कच्चे तेल का निर्यात रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है।
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The @USTreasury continues our Economic Fury campaign against the Iranian regime. Their troops are not getting paid, the police are not reporting for work, and Kharg Island is shut down. The Iranian economy and currency are in free fall. Iran’s Persian Gulf Strait Authority… — Treasury Secretary Scott Bessent (@SecScottBessent) May 28, 2026
बिना युद्ध के ईरान को घुटनों पर लाना
पेंटागन और व्हाइट हाउस की यह नई रणनीति साफ संकेत दे रही है कि अमेरिका अब सीधे सैन्य संघर्ष के बजाय आर्थिक चोट पहुंचाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे युद्ध समाप्त करना चाहते हैं, लेकिन वे किसी जल्दबाजी में नहीं हैं।
ट्रंप का मानना है कि या तो ईरान के साथ एक बेहद ‘मजबूत डील’ होगी या फिर कोई समझौता नहीं होगा। साथ ही, उन्होंने खाड़ी देशों को ‘अब्राहम समझौते’ में शामिल होने का आह्वान किया है, ताकि क्षेत्र में स्थायी शांति आ सके।
मोजतबा खामेनेई का पलटवार
अमेरिका की इस घेराबंदी पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संदेश में उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल मिलकर इस्लामी गणराज्य ईरान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
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राष्ट्रीय विधायिका की वर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने देशवासियों से एकता और सामंजस्य बनाए रखने की अपील की है। खामेनेई ने इसे ‘आर्थिक और सांस्कृतिक जिहाद’ का समय बताते हुए कहा कि दुश्मन देश के भीतर दरार पैदा करना चाहता है, जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
