

US Economic D-Day Against Iran: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा गंभीर सैन्य और कूटनीतिक संघर्ष अब अपने सबसे संवेदनशील और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हालिया बयान ने वैश्विक स्तर पर भारी खलबली मचा दी है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के तहत ईरान के खिलाफ हर संभव सख्त कदम उठाया जा रहा है। अब अमेरिका ईरान पर ऐसा बड़ा आर्थिक हमला करने की तैयारी कर रहा है, जिससे तेहरान की बची-कुची आर्थिक सांसें भी पूरी तरह थम जाएं।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए ईरान को लेकर बेहद चौंकाने वाले आंकड़े और दावे पेश किए हैं। बेसेंट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। उन्होंने आधिकारिक दावा किया कि ईरान की लगभग 100 प्रतिशत सैन्य फैक्ट्रियों को जमींदोज कर दिया गया है और उनका पूरा परमाणु कार्यक्रम अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। इस सैन्य तबाही के दावों के बाद अब अमेरिकी प्रशासन ईरान को पूरी तरह घुटनों पर लाने के लिए अपने अगले कदम की ओर बढ़ रहा है।
सैन्य कार्रवाई के बाद अब अमेरिका ईरान के खिलाफ एक महा-आर्थिक युद्ध शुरू करने जा रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री ने ऐलान किया है कि अब हम इस संघर्ष के सबसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर रहे हैं, जहां एक भीषण 'इकोनॉमिक D-Day' की शुरुआत होगी। बेसेंट के अनुसार, यह किसी भी दुश्मन देश के खिलाफ इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और विनाशकारी आर्थिक हमला होने जा रहा है। इस बड़े हमले का सीधा मकसद तेहरान की सरकार को सहारा देने वाली हर एक आर्थिक लाइफलाइन और वित्तीय मदद को हमेशा के लिए समाप्त करना है, ताकि ईरान पूरी दुनिया में बिल्कुल अकेला पड़ जाए।
अमेरिकी प्रशासन ने तेहरान और उसके समर्थकों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि वे अमेरिकी इरादों को हल्के में न लें। स्कॉट बेसेंट ने कहा कि जो लोग भी तेहरान की बात न मानने के खतरों से डरते हैं, उन्हें वॉशिंगटन की मारक क्षमता और कड़े फैसले लेने की ताकत को कम करके आंकने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप ने अब ऐसी परिस्थितियां और मार्ग तैयार कर दिए हैं, जिससे अमेरिकी सरकार की हर एजेंसी और हर अथॉरिटी उस बेहद सख्त कदम को भी उठा सके, जिसे उठाने के बारे में पहले लोगों को लगता था कि अमेरिका ऐसा कभी नहीं करेगा।
अमेरिका ने केवल ईरान को ही नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय और अपने सहयोगी देशों के सामने भी सख्त शर्तें रख दी हैं। बेसेंट ने कहा कि अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए अपना रुख स्पष्ट करने का समय आ गया है कि क्या वे वॉशिंगटन के इस दबाव बनाने वाले अभियान का समर्थन करेंगे। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप भी यह साफ कर चुके हैं कि ईरान को किसी भी तरह की लाइफलाइन या मदद देने वाले देशों को गंभीर आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
इस पूरे महा-तनाव का सीधा और बेहद प्रतिकूल असर भारत सहित दुनिया के तमाम देशों पर भी पड़ रहा है। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और न खुल पाने की वजह से भारत समेत कई देशों को कच्चे तेल की भारी किल्लतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में अमेरिका के इस नए और आक्रामक आर्थिक हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा और तेल बाजार में संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है।