UAE ने ईरान से मुआवजे की मांग की (सोर्स- सोशल मीडिया)
UAE Demands Compensation from Iran: ईरान द्वारा पेश की गई 10 सूत्रीय सीजफायर शर्तों में युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई (मुआवजा) एक अहम मुद्दा बनकर उभरा है। ईरान का कहना है कि उसे युद्ध के बाद पुनर्निर्माण (रिकंस्ट्रक्शन) के लिए पूरा मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात ने भी इसी तरह की मांग उठाते हुए कहा है कि खाड़ी देशों में हुए हमलों के नुकसान की भरपाई ईरान को करनी चाहिए।
UAE ने यह भी सवाल उठाया है कि प्रस्तावित सीजफायर से यह कैसे सुनिश्चित होगा कि ईरान क्षेत्र में अपनी शत्रुता खत्म करेगा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलेगा। UAE के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि समझौते की शर्तों पर और स्पष्टता जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि तेहरान बिना किसी शर्त के तनाव खत्म करेगा।
UAE ने अपने बयान में यह भी जोर दिया कि ईरान को हालिया हमलों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, पिछले 40 दिनों में ईरान ने बिना किसी उकसावे के खाड़ी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा सुविधाओं और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ।
UAE ने साफ किया कि वह इस युद्ध का हिस्सा नहीं रहा है और उसने शुरू से ही संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए। इन प्रयासों में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के भीतर संवाद और क्षेत्रीय पहल शामिल थीं। साथ ही, UAE ने दावा किया कि उसने अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की सफलतापूर्वक रक्षा की है।
इसके अलावा, UAE ने मांग की है कि ईरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 (2026) का पूरी तरह पालन करे, जिसे 11 मार्च 2026 को पारित किया गया था। इस प्रस्ताव में ईरानी हमलों की निंदा करते हुए उन्हें तुरंत रोकने की मांग की गई थी।
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जहां एक ओर ईरान खुद मुआवजे की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देश भी उससे जवाबदेही और नुकसान की भरपाई की मांग कर रहे हैं। इससे साफ है कि सीजफायर के बावजूद क्षेत्र में तनाव और कूटनीतिक टकराव अभी भी जारी है।