इराक की गुफा में तुर्की के 8 सैनिकों की मौत, एर्दोगन को तगड़ा झटका; मचा हड़कंप
उत्तरी इराक में एक दर्दनाक हादसे में मीथेन गैस के रिसाव के कारण आठ तुर्की सैनिकों की जान चली गई। ये सैनिक वर्ष 2022 में मारे गए अपने एक साथी के अवशेषों की तलाश में निकले थे। बताया जा रहा है कि वे...
- Written By: अमन उपाध्याय
इराक की गुफा में तुर्की के 8 सैनिकों की मौत, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
बगदाद: उत्तरी इराक में तुर्की सेना के जवानों के साथ एक दर्दनाक हादसा हुआ है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रविवार को सैनिक एक पहाड़ी गुफा में 2022 में मारे गए एक साथी जवान के अवशेषों की तलाश कर रहे थे। इसी दौरान वे मीथेन गैस के संपर्क में आ गए। गैस रिसाव के कारण 19 सैनिक प्रभावित हुए, जिनमें से 8 की दम घुटने से मौत हो गई।
मंत्रालय के अनुसार, इसके चपेट में आए सभी सैनिकों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद आठ जवानों को नहीं बचाया जा सका। इस घटना के बाद भी इलाके में राहत और बचाव अभियान जारी है। हालांकि मंत्रालय ने हादसे की सटीक जगह की जानकारी नहीं दी, लेकिन यह जरूर बताया कि यह “क्लॉ-लॉक ऑपरेशन” के तहत आने वाले क्षेत्र में हुआ यह वही सैन्य अभियान है जो अप्रैल 2022 में उत्तरी इराक में कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) के खिलाफ शुरू किया गया था।
तीन साल पहले मारे गए थे
मंत्रालय ने बताया कि मई 2022 में तुर्की की एक इकाई मीथेन गैस से प्रभावित हो गई थी, जब वह सर्च-एंड-क्लियर ऑपरेशन के तहत उस सेना अधिकारी के अवशेष खोज रही थी, जो तीन साल पहले आतंकियों की गोलीबारी में मारा गया था। बीते तीन वर्षों से टीमें उसके अवशेष ढूंढ़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिल पाई है।
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अस्पताल के रूप में किया गया गुफा का इस्तेमाल
जिस गुफा की तलाशी ली जा रही थी, वह समुद्र तल से 852 मीटर (2,795 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इस गुफा का इस्तेमाल पहले PKK द्वारा एक अस्थायी अस्पताल के रूप में किया गया था, हालांकि बाद में तुर्की सेना ने इस इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया था। तुर्की और PKK के बीच बीते चार दशकों से जारी संघर्ष इराक और सीरिया की सीमाओं तक फैला हुआ है। इस दौरान तुर्की ने उत्तरी इराक में कई सैन्य ठिकानों की स्थापना की है, जहां PKK लंबे समय से सक्रिय रहा है। हालांकि अब तुर्की सरकार और PKK के बीच एक सहमति बनी है, जिसके तहत उम्मीद की जा रही है कि PKK के लड़ाके आने वाले कुछ दिनों में अपने हथियार सरकार को सौंप देंगे।
