

Erdogan Kashmir Statement UNGA 2026: अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में इस समय संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 81वीं बैठक चल रही है। मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने UNGA के मंच पर अपनी बात रखी। इसी बीच तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने एक बार वैश्विक मंच पर कश्मीर का राग अलापा। एर्दोगन इससे पहले भी ऐसा कर चुके हैं।
एर्दोगन ने UNGA में अपने संबोधन के दौरान कहा कि दक्षिण एशिया के सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर और प्रासंगिक प्रस्तावों के दायरे में बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। इसमें कश्मीर भी शामिल है। एर्दोगन ने पिछले साल भी UNGA में यह मुद्दा उठाया था, जिस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।
तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने UNGA में अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया में यह अहम है कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संबंधित प्रस्तावों के ढांचे के अंदर संवाद के माध्यम से संबोधित किया जाए। एर्दोगन ने अपने बयान के साथ एक बार फिर कश्मीर के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की, जबकि भारत लगातार यह कहता आ रहा है कि यह उसका आंतरिक मामला है।
एर्दोगन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर तनाव बना हुआ है और दोनों ही देशों के रुख में कोई बदलाव नहीं देखा गया है। यह पहली बार नहीं है जब तुर्किये के राष्ट्रपति ने संयुक्त राष्ट्र या किसी अन्य वैश्विक मंच से कश्मीर के मुद्दे को हवा दी हो।
एर्दोगन ने इससे पहले सितंबर 2025 में भी उन्होंने अपने UNGA संबोधन में कश्मीर का जिक्र किया था। उन्होंने इसे बड़ा मुद्दा बताते हुए इसके समाधान की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में रहने वाले लोगों की भलाई में इस मुद्दे का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के आधार पर और बातचीत के माध्यम से निकलना चाहिए।
तुर्किये और एर्दोगन लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्षधर रहे हैं। यही कारण है कि एर्दोगन समय-समय पर वैश्विक मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाते रहते हैं। हालांकि भारत ने हर बार उनके ऐसे कदमों की आलोचना की । भारत ने स्पष्ट किया है कि यह उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप मंजूर नहीं है।