तुलसी गबार्ड, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Tulsi Gabbard Pakistan Nuclear Threat: दुनिया का ध्यान जहां इस वक्त ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष पर टिका है, वहीं अमेरिका ने एक और पड़ोसी देश को लेकर बेहद कड़ी चेतावनी जारी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समर्थक और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक (DNI) तुलसी गबार्ड ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि अमेरिका के लिए पाकिस्तान भी सबसे बड़ा परमाणु खतरा बना हुआ है।
बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी की वार्षिक सुनवाई के दौरान गबार्ड ने वैश्विक खतरों का विश्लेषण पेश किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिकी खुफिया विभाग के आकलन के अनुसार पाकिस्तान, रूस, चीन और उत्तर कोरिया सक्रिय रूप से नई और उन्नत मिसाइल डिलीवरी प्रणालियों का विकास कर रहे हैं।
ये प्रणालियां परमाणु और पारंपरिक, दोनों तरह के वॉरहेड ले जाने में सक्षम हैं, जो सीधे तौर पर अमेरिका को अपनी मारक सीमा के भीतर लाती हैं। गबार्ड ने यह भी चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया अब रूस और चीन के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत कर रहा है।
ईरान में 28 फरवरी से जारी युद्ध पर टिप्पणी करते हुए गबार्ड ने कहा कि हालांकि तेहरान की सरकार अभी भी कायम दिखती है, लेकिन वह काफी हद तक कमजोर हो चुकी है। उन्होंने इसके लिए अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का विशेष रूप से जिक्र किया। गबार्ड के अनुसार, इस अभियान ने ईरान की शक्ति को काफी नुकसान पहुँचाया है, हालांकि तेहरान और उसके सहयोगी अभी भी मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों पर हमला करने में सक्षम हैं।
इसी बीच, युद्ध के मैदान से एक और बड़ी खबर सामने आई है। इजरायल ने दावा किया है कि सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की हत्या के महज 24 घंटे के भीतर उसने ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को भी खत्म कर दिया है। इसे इजरायल की ओर से की गई अब तक की सबसे घातक कार्रवाई माना जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल के 100 ठिकानों पर हमला किया है।
यह भी पढ़ें:- ‘अब कोई सुरक्षित नहीं’, गैस क्षेत्र पर इजरायली बमबारी के बाद भड़का ईरान, खाड़ी देशों को दी दहलाने की धमकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के लंबा चलने के संकेत देते हुए कहा है कि वे ‘पागलों को परमाणु हथियार नहीं दे सकते’। इसी बीच वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ आया है जहां रूस ने संकट में फंसे पाकिस्तान की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है और उसे सस्ते तेल की पेशकश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों का बढ़ता परमाणु तालमेल और रूस का दखल आने वाले समय में स्थिति को और जटिल बना सकता है।