शपथ के दौरान ट्रंप के साथ ‘मां’ की दी गई बाइबिल होगी, आखिर इसके पीछे की क्या है वजह
डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह कैपिटल रोटुंडा में होगा, क्योंकि मौसम बहुत ठंडा रहेगा। ट्रंप अपनी मां से मिली बाइबिल और लिंकन की बाइबिल पर शपथ लेंगे।
- Written By: अमन उपाध्याय
बाइबिल की फोटोः ( सो. सोशल मीडिया )
नवभारत डेस्कः डोनाल्ड ट्रंप अपनी मां द्वारा दी गई बाइबिल और लिंकन की बाइबिल पर शपथ लेंगे. उनका शपथ ग्रहण समारोह कैपिटल रोटुंडा के अंदर होगा, क्योंकि मौसम बहुत ठंडा रहने का अनुमान है। ट्रंप 20 जनवरी, सोमवार को अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप व अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ ग्रहण लेंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप अपनी मां से मिली बाइबिल के साथ शपथ ग्रहण करेंगे। यह बाइबिल ट्रंप को 1955 में जमैका, न्यूयॉर्क के फर्स्ट प्रेस्बिटेरियन चर्च में उनके संडे स्कूल ग्रेजुएशन के मौके पर मिली थी। बता दें कि यह बाइबिल 1953 में न्यूयॉर्क के थॉमस नेल्सन एंड संस द्वारा प्रकाशित हुई थी और इसमें उनका नाम कवर के निचले हिस्से पर उभरा हुआ है।
मीडिया रिपोर्ट की मानें तो इस बाइबिल में अंदर के कवर पर चर्च के अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, और उस पर राष्ट्रपति का नाम और उसे कब प्रस्तुत किया गया, इसका जानकारी दी गई है।
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केवल तीन बार किया गया है इस्तेमाल
घोषणा में बताया गया है कि ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में उनकी बाइबिल के साथ-साथ लिंकन बाइबिल का भी उपयोग किया जाएगा। लिंकन बाइबिल को पहली बार 4 मार्च, 1861 को 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के शपथ ग्रहण में इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद इस बाइबिल का इस्तेमाल केवल तीन बार हुआ है—राष्ट्रपति बराक ओबामा के दोनों शपथ ग्रहणों में और राष्ट्रपति ट्रंप के 2017 के शपथ ग्रहण में. यह बाइबिल बरगंडी रंग की मखमली जिल्द में है और लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस में रखी गई है।
मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं शपथ
अमेरिका में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति को शपथ दिलाने का काम अमेरिका के मुख्य न्यायाधीश (चीफ जस्टिस ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स) करते हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण के समय बाइबिल का उपयोग एक पुरानी परंपरा है, जो अब्राहम लिंकन के समय से चली आ रही है। बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद की शपथ लेते समय बाइबिल पर हाथ रखा जाता है, क्योंकि बाइबिल ईसाई धर्म का पवित्र ग्रंथ है। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडेन ने भी शपथ लेते समय बाइबिल पर हाथ रखा था।
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अमेरिका के अधिकांश राष्ट्रपति ईसाई धर्म के अनुयायी रहे हैं, और ईसाई धर्म में बाइबिल को सबसे पवित्र किताब माना जाता है। यही कारण है कि यह परंपरा आज भी जारी है।
बाइबिल में मानवता की भलाई
बाइबल में करीब 2000 साल पहले ईसा मसीह द्वारा दिए गए उपदेशों का संग्रह है, जो मानवता की भलाई के लिए थे। बाइबल के अनुसार, जो लोग प्रभू पर विश्वास रखते हैं, वे कभी कमजोर नहीं होते।
