व्हाइट हाउस का बड़ा एलान: ‘वार्ता की मेज पर आया ईरान’, क्या रुक जाएगा मिडिल ईस्ट का भीषण महायुद्ध?
US Iran War: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के 25 दिनों में अमेरिका ने 9,000 ईरानी सैन्य ठिकाने नष्ट करने का दावा किया, जिससे नौसेना और मिसाइल क्षमता घटने पर ईरान शांति वार्ता को तैयार हुआ।
- Written By: अक्षय साहू
कैरोलिन लेविट (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Warns Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को बड़ी सफलता करार दिया है। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि केवल 25 दिनों के भीतर उसने ईरान की सैन्य संरचना को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया है। यह बयान व्हाइट हाउस की ओर से प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने दी।
कैरोलिन लेविट के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद ईरान अब बातचीत और शांति की दिशा में आगे बढ़ने को मजबूर हो गया है। अमेरिका ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह केवल चेतावनी नहीं देता, बल्कि जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करता है।
9,000 लक्ष्यों पर किए गए हमले
अमेरिकी दावों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान 9,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमले किए गए, जिससे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में लगभग 90 प्रतिशत तक गिरावट आई है। सबसे अधिक नुकसान ईरानी नौसेना को हुआ है। अमेरिका का कहना है कि उसने 140 से ज्यादा नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इतने कम समय में किसी नौसेना को हुआ सबसे बड़ा नुकसान बताया जा रहा है।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, वहां सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका ने ईरान के रक्षा ढांचे को व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया। हाल ही में अमेरिकी सेना ने 5,000 पाउंड वजनी बमों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के भूमिगत ठिकानों को तबाह किया, जहां एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें और मोबाइल लॉन्चर छिपाए गए थे।
परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा ईरान
अमेरिका का यह भी दावा है कि इस अभियान ने ईरान की परमाणु हथियार बनाने की संभावनाओं को गंभीर झटका दिया है। अधिकारियों के अनुसार, यह ऑपरेशन तय समय से पहले ही अपने लक्ष्यों को हासिल कर रहा है। प्रारंभिक अनुमान था कि इसे पूरा होने में चार से छह सप्ताह लगेंगे, लेकिन प्रगति अपेक्षा से तेज रही।
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व्हाइट हाउस ने यह भी बताया कि बातचीत की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमले फिलहाल रोके गए हैं। हालांकि, अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं होता, तो वह और भी बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
