अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Trump Secret Meeting Sergio Gor: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल अब पहले से कहीं अधिक काले और घने हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को दी गई ‘मिडनाइट डेडलाइन’ का समय जैसे-जैसे करीब आ रहा है कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उस ‘सीक्रेट मीटिंग’ की हो रही है जो ट्रंप हमले की समय सीमा से ठीक 60 मिनट पहले करने वाले हैं।
व्हाइट हाउस के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार रात 8 बजे की डेडलाइन से ठीक एक घंटे पहले, यानी रात 7 बजे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के साथ एक बंद कमरे में डिनर मीटिंग करेंगे।
दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञ इस बात को लेकर हैरान हैं कि ईरान के साथ संभावित युद्ध की घोषणा से ठीक पहले ट्रंप भारत में अमेरिकी दूत के साथ क्या चर्चा करने वाले हैं। हालांकि इस बैठक का एजेंडा अभी तक आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है लेकिन इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
यह सीक्रेट मीटिंग (Secret Meeting) ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वह मंगलवार रात 8 बजे (पूर्वी समय) तक समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं करता और Strait of Hormuz को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए नहीं खोलता है तो अमेरिका भीषण सैन्य कार्रवाई शुरू कर देगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपनी योजना को लेकर बेहद सख्त तेवर अपनाए हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि अमेरिका के पास ऐसी सैन्य योजना तैयार है जिसके माध्यम से मात्र चार घंटे के भीतर ईरान के प्रत्येक बिजली संयंत्र, पुल और महत्वपूर्ण नागरिक बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट किया जा सकता है।
ट्रंप ने यहां तक कहा कि इन हमलों के बाद ईरान ‘पषाण युग’ (Stone Ages) में वापस चला जाएगा। उन्होंने इस बात को भी खारिज कर दिया कि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आएगा, उनका तर्क है कि यह कार्रवाई ईरान को समझौते के लिए मजबूर करने के लिए आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले 45 दिनों से युद्धविराम (Ceasefire) स्थापित करने की कोशिशें चल रही थीं लेकिन फिलहाल वे विफल साबित होती दिख रही हैं। ट्रंप ने पहले इन प्रस्तावों को महत्वपूर्ण बताया था लेकिन अब उन्होंने इसे नाकाफी करार दिया है। दूसरी ओर, ईरान ने भी किसी भी दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया है।
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ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप की धमकियों को ‘घमंडी’ और ‘बेबुनियाद’ बताते हुए कहा है कि उनकी सेना के अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगे। ईरानी राष्ट्रपति ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे अपनी जनता की रक्षा के लिए किसी भी बलिदान के लिए तैयार हैं और वे अमेरिकी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। अब पूरी दुनिया की नजरें उस एक घंटे की समय सीमा पर टिकी हैं जो यह तय करेगी कि मध्य पूर्व शांति की ओर बढ़ेगा या महाविनाश की ओर।