इस्लामाबाद में ही होगी शांति वार्ता, सामने आई मीटिंग की तारीख, इस दिन फिर आमने-सामने होंगे ईरान-अमेरिका

US-Iran War: मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद! अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर महा-वार्ता के लिए पाकिस्तान का इस्लामाबाद तैयार है, जहाँ सोमवार से निर्णायक दौर शुरू होने की संभावना है।
US-Iran Peace Talks
इस्लामाबाद में होगी ईरान-अमेरिका के बीत दूसरे दौर की शांति वार्ता (सोर्स- सोशल मीडिया)
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US-Iran Peace Talks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिशें एक बार फिर तेज होती नजर आ रही हैं। अमेरिका और ईरान (Iran) के बीच परमाणु मुद्दे पर नई वार्ता का दौर शुरू होने की तैयारी है, और इस बार संभावित मेजबानी पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद कर सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधि रविवार तक पहुंच सकते हैं, जबकि औपचारिक बातचीत सोमवार से शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

हालांकि अब तक न तो अमेरिका और न ही ईरान (Iran) ने इस बैठक की आधिकारिक पुष्टि की है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि पर्दे के पीछे तैयारी काफी आगे बढ़ चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि बातचीत जल्द शुरू हो सकती है। वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि अगला दौर तय हो चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए संवाद बनाए रखना चाहते हैं।

21 घंटे तक चली थी वार्ता

पिछले सप्ताह हुई बातचीत कई घंटों तक चली थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था। ऐसे में इस बार की वार्ता काफी अहम मानी जा रही है, खासकर इसलिए क्योंकि पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ अस्थायी सीजफायर अब खत्म होने के करीब है। यदि इस बार भी वार्ता विफल रहती है, तो क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ सकता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बैठक पर टिकी हुई है।

अमेरिका को समझौते की संभावना

अमेरिकी पक्ष को उम्मीद है कि समझौता संभव है। ट्रंप का मानना है कि ईरान कुछ प्रमुख मुद्दों पर नरम रुख अपना सकता है। हालांकि ईरान (Iran) के वरिष्ठ अधिकारियों ने इन दावों पर संदेह जताया है और कहा है कि अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

इस पूरे संकट का केंद्र होर्मुज स्ट्रेट बना हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरान ने भले ही इसे व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला बताया हो, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है। ईरान ने चेतावनी भी दी है कि यदि अमेरिकी नौसैनिक दबाव जारी रहा, तो इस मार्ग को बंद किया जा सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है। 

इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर लागू

इधर लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लागू सीजफायर भी इस वार्ता को प्रभावित कर रहा है। दोनों पक्षों के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, और उल्लंघन के आरोप सामने आ रहे हैं। चूंकि ईरान हिजबुल्लाह का समर्थक है, इसलिए यह मुद्दा भी बातचीत में अहम भूमिका निभा सकता है। कुल मिलाकर, क्षेत्रीय शांति के लिए यह वार्ता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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