अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
American Reciprocal Trade Agreements: अमेरिका के आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना नया 2026 व्यापार एजेंडा पेश किया है। “अमेरिका वापस आ गया है” के नारे के साथ इस योजना में मैन्युफैक्चरिंग नौकरियों को फिर से देश में लाने का वादा किया गया है। इस नई नीति का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ जैसे प्रमुख देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों में संतुलन और पारदर्शिता लाना है। व्हाइट हाउस का मानना है कि व्यापार केवल मुनाफे का जरिया नहीं, बल्कि अब राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।
हाइपर-ग्लोबलाइजेशन के दौर में अमेरिका ने लगभग 50 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खो दीं और 70 हजार से ज्यादा कारखाने बंद हो गए। पिछले कुछ वर्षों में वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार घाटा 40 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिसे कम करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। प्रशासन का मानना है कि उत्पादन से न केवल वेतन बढ़ता है, बल्कि इससे नवाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा को भी काफी मजबूती मिलती है।
प्रशासन ने अपनी टैरिफ-आधारित रणनीति को शुरुआती सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि वस्तुओं का व्यापार घाटा साल-दर-साल कम हो रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका को अब उसी सामान का उत्पादन करना चाहिए जिसका वह खुद सबसे अधिक उपभोग करता है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अमेरिका अपने औद्योगिक आधार को भविष्य की चुनौतियों और युद्धकालीन स्थिति के अनुरूप ढालने की तैयारी कर रहा है।
एग्रीमेंट ऑन रेसिप्रोकल ट्रेड (ART) के तहत भारत, जापान और यूरोपीय संघ जैसे देशों के साथ नए ढांचागत समझौतों की घोषणा की गई है। इन समझौतों के मुताबिक, भारत अपनी औद्योगिक वस्तुओं पर 99 प्रतिशत टैरिफ खत्म करेगा, जबकि अमेरिका संशोधित टैरिफ दरों को बरकरार रखेगा। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देना है, जो साल 2025 में पहले ही रिकॉर्ड 3.4 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है।
दस्तावेज में कहा गया है कि यह केवल बयानबाजी नहीं है, बल्कि बढ़ते हुए निर्यात के ये आंकड़े खुद ही अपनी पूरी कहानी बयां कर रहे हैं। पूंजीगत वस्तुओं के निर्यात में भी 9.9 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जो अमेरिकी उद्योगों के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है। समान विचारधारा वाले भागीदारों के साथ महत्वपूर्ण खनिजों पर नया व्यापार समझौता करना भी इस नई योजना का एक बहुत अहम हिस्सा है।
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साल 2025 में चीन के साथ व्यापार घाटे में 32 प्रतिशत की कमी आई है, जो साल 2000 के बाद एक बहुत ही ऐतिहासिक बदलाव है। दस्तावेज के अनुसार, 2001 में चीन के WTO में शामिल होने के बाद से अमेरिका ने अपनी लाखों कीमती नौकरियां हमेशा के लिए गंवाई थीं। अब ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच हुए ‘बुसान समझौते’ के जरिए व्यापार में पारस्परिकता और संतुलन लाने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह चीन के साथ व्यापार जारी रखेगा, लेकिन यह केवल समानता और आपसी लाभ के आधार पर होगा। आने वाले समय में महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करना और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिकी हितों को बढ़ाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। अब्राहम लिंकन की बात दोहराते हुए एजेंडे में कहा गया है कि हमें अब ‘नए सिरे से सोचने और नए सिरे से काम करने’ की जरूरत है।