हम कभी नहीं झुकेंगे…’सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए लक्ष्मण रेखा’, आसिम मुनीर ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कहा कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है। मुनीर ने इस समझौते को एक तरह की 'लक्ष्मण रेखा' बताते हुए कहा कि भारत को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
- Written By: अमन उपाध्याय
असीम मुनीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने एक बार फिर भारत के खिलाफ कड़ी बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि सिंधु जल संधि पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण सीमा रेखा की तरह है, जिसे वह कभी भी टूटने या बदलने नहीं देगा। आसिम मुनीर ने यह भी बताया कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान के 24 करोड़ लोगों का बुनियादी अधिकार है।
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने के निर्णय ने पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य वर्गों में गंभीर असंतोष पैदा कर दिया है। मुनीर ने इस समझौते को एक तरह की ‘लक्ष्मण रेखा’ बताया है। इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना के प्रमुख ने भारत को इसके परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी है।
आतंकवादी हमले भारत ने दिया करारा जवाब
भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित 9 आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमला किया। इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय बहावलपुर में पूरी तरह तबाह हो गया, जबकि लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मुरीदके में नष्ट कर दिया गया। यह कार्रवाई भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले का जवाब देते हुए की थी, जिसमें 26 पर्यटक मारे गए थे।
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पाकिस्तान ने किया युद्धविराम की मांग
इसको देख पाकिस्तान ने 8 से 10 मई के बीच भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली S400 ने सभी हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेसों को बमबारी कर तबाह कर दिया। इस हमले को देख पाकिस्तान पूरी तरह दहशत में आ गया। आखिरकार 10 मई को पाकिस्तान ने युद्धविराम की मांग की, जिसे भारत ने स्वीकार कर लिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में आतंकवाद के समर्थन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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इस घटना के बाद भारत को पता था कि पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर खुद को पीड़ित के रूप में पेश करेगा। इसलिए भारत ने सात सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों में भेजे ताकि सिंधु जल संधि के निलंबन का कारण स्पष्ट किया जा सके। साथ ही, ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ एक जरूरी कदम के रूप में प्रस्तुत किया जा सके और पाकिस्तान द्वारा बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों को भी सामने लाया जा सके।
