

Crown Prince Salman Vision 2030 Saudi Loan And Economy Crisis: दुनिया के कई जरूरतमंद देशों को आर्थिक सहायता और कर्ज देने वाले अमीर देशों में शामिल सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब अब अंतरराष्ट्रीय बाजार से कम से कम 8 अरब डॉलर का नया सिंडिकेटेड लोन जुटाने की तैयारी कर रहा है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 7.6 खरब रुपये बैठती है। बताया जा रहा है कि ईरान से जुड़े युद्ध के आर्थिक प्रभाव, तेल निर्यात में कमी और विजन 2030 के भारी खर्चों ने सऊदी अरब की वित्तीय जरूरतें बढ़ा दी हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी सरकार इस बड़े कर्ज को जुटाने के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बैंकों के साथ बातचीत कर रही है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल होने के बावजूद किंगडम को अब अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं और बढ़ते सरकारी खर्च को पूरा करने के लिए बाहरी वित्तपोषण की जरूरत पड़ रही है।
कभी पाकिस्तान सहित कई देशों को आर्थिक मदद देने वाला सऊदी अरब अब खुद बड़े पैमाने पर कर्ज लेने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार के सामने तेल से होने वाली आय को बनाए रखने और विकास परियोजनाओं पर खर्च जारी रखने की दोहरी चुनौती खड़ी है।
सऊदी अरब की सरकारी आय का प्रमुख स्रोत कच्चा तेल है, लेकिन क्षेत्रीय संघर्ष और समुद्री व्यापार मार्गों में आई बाधाओं ने तेल व्यापार पर दबाव बढ़ा दिया है। ऊर्जा ढांचे पर हमलों और हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं।
इन घटनाओं के कारण तेल निर्यात और सप्लाई चेन को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के तेल क्षेत्र में करीब 25 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जिससे सरकारी राजस्व पर सीधा असर पड़ा। तेल आय में कमी ऐसे समय आई है, जब सरकार को विकास और सुरक्षा पर भारी खर्च करना पड़ रहा है।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का महत्वाकांक्षी विजन 2030 सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने की योजना है। वर्ष 2016 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत पर्यटन, मनोरंजन, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस योजना के तहत NEOM, रेड सी प्रोजेक्ट और क़िद्दिया जैसे बड़े गिगा-प्रोजेक्ट्स पर भारी निवेश किया जा रहा है। इन योजनाओं के लिए कुल मिलाकर 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक निवेश की जरूरत बताई जा रही है।
साल 2026 की पहली तिमाही में सऊदी अरब का बजट घाटा 33.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वित्त मंत्रालय ने करीब 58 अरब डॉलर की कुल फाइनेंसिंग जरूरत का संकेत दिया है।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ सऊदी अरब का रक्षा खर्च भी लगातार बढ़ा है। वर्ष 2025 में देश का रक्षा बजट करीब 78 अरब डॉलर तक पहुंचने की बात कही गई है। यह कुल सरकारी खर्च का बड़ा हिस्सा है।
विकास परियोजनाओं, सुरक्षा जरूरतों और बजट घाटे के कारण 2026 के मध्य तक सऊदी अरब का सार्वजनिक कर्ज करीब 450 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि देश की मजबूत वित्तीय स्थिति और क्रेडिट रेटिंग अब भी निवेशकों के लिए भरोसेमंद मानी जाती है, लेकिन बढ़ता कर्ज सऊदी सरकार के लिए नई आर्थिक चुनौती बन सकता है।