मोहम्मद बिन सलमान और डोनाल्ड ट्रंप पर न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट से मचा बवाल, सऊदी ने दी सफाई

Saudi Denies Report: न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ट्रंप को ईरान पर हमले जारी रखने के लिए उकसा रहे हैं, जिसका सऊदी अरब ने खंडन किया है।
Controversy over NYT Report on MBS and Trump Regarding Iran Attacks; Saudi Denies Claims
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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MBS Advising Trump On Iran: हाल ही में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया विवाद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी बवाल खड़ा कर दिया है। इस रिपोर्ट में सनसनीखेज दावा किया गया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान पर सलाह दे रहे हैं। इस खबर के सामने आते ही सऊदी अरब के आधिकारिक हलकों में खलबली मच गई और किंगडम के सूत्रों को इस संवेदनशील मामले पर तुरंत स्पष्टीकरण देना पड़ा है। सऊदी अरब ने इन दावों को पूरी तरह आधारहीन बताते हुए खारिज किया है, लेकिन इस विवाद ने ईरान और उसके पड़ोसी देशों के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रविवार की रिपोर्ट में आरोप लगाया कि मोहम्मद बिन सलमान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान के मुद्दे पर गहन चर्चा हुई है। रिपोर्ट के अनुसार क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को सुझाव दिया कि ईरान की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए उन पर जोरदार हमले जारी रखना आवश्यक है। इस दावे ने वैश्विक मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा क्योंकि यह क्षेत्र में शांति प्रयासों और कूटनीतिक संबंधों की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा माना जा रहा है।

सऊदी अरब का खंडन

सऊदी अरब के सरकारी सूत्रों ने इस रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से 'झूठा' और मनगढ़ंत करार दिया है ताकि किसी प्रकार का भ्रम न रहे। सऊदी टेलीविजन नेटवर्क अल अरबिया ने बताया कि किंगडम की लीडरशिप ट्रंप को ईरान के खिलाफ युद्ध लंबा खींचने के लिए कड़ा उकसावा देने वाली कोई बात नहीं कह रही है। सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि वे क्षेत्र में स्थिरता चाहते हैं और इस तरह की खबरें केवल दो देशों के बीच गलतफहमी पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं।

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने उन पड़ोसी देशों से तुरंत सफाई मांगी है जो कथित तौर पर इन हमलों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इजरायल और अमेरिका की बमबारी में अब तक सैकड़ों निर्दोष ईरानी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं। ईरान ने विशेष रूप से उन देशों को निशाने पर लिया है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं और जो ईरान के खिलाफ हमलों के लिए अपने क्षेत्र का उपयोग करने दे रहे हैं।

मानवीय क्षति का विवरण

ईरानी राजदूत अली बहरेनी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में बताया कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इन हमलों में घायल होने वाले लोगों की संख्या 7,000 से अधिक हो गई है और मारे गए लोगों में 200 से अधिक मासूम बच्चे भी शामिल हैं। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी दी है कि अगर इस तरह की सैन्य आक्रामकता को तुरंत नहीं रोका गया तो अन्य देश भी भविष्य में इसका शिकार हो सकते हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा की चिंता

ईरान की समुद्री सीमाएं खाड़ी के कई महत्वपूर्ण देशों के साथ लगती हैं और इन देशों में अमेरिका के बड़े सैन्य अड्डे रणनीतिक रूप से स्थापित हैं। अरागची ने उन रिपोर्टों पर चिंता जताई जिनमें पड़ोसी देशों द्वारा कत्लेआम को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करने और हमलों की इजाजत देने का दावा किया गया था। सऊदी अरब की सफाई के बाद भी क्षेत्र में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है क्योंकि युद्ध की स्थिति में हर छोटी रिपोर्ट बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

ट्रंप की सैन्य कार्रवाई

इधर डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 7,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले कर उनकी सैन्य शक्ति को तोड़ा है। ट्रंप ने ईरान को एक 'कागजी शेर' बताया और दावा किया कि उनकी नौसेना और वायु सेना इन हमलों के बाद पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। सऊदी क्राउन प्रिंस और ट्रंप के बीच कथित कूटनीतिक तालमेल की खबरें इस सैन्य कार्रवाई के बीच और भी अधिक महत्वपूर्ण और विवादास्पद हो गई हैं।

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