पाकिस्तान में फंसी भारतीय Sarbjit Kaur पर लटकी FIR की तलवार, लाहौर कोर्ट ने FIA से मांगी रिपोर्ट
Sarbjit Kaur Pakistan Case: तीर्थयात्रा पर पाकिस्तान जाकर धर्म बदलकर शादी करने वाली सरबजीत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लाहौर सेशन कोर्ट ने वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध प्रवास पर FIA से रिपोर्ट मांगी है।
- Written By: प्रिया सिंह
पाकिस्तान में फंसी भारतीय महिला सरबजीत कौर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Lahore Session Court: धार्मिक यात्रा पर पाकिस्तान जाकर धर्म परिवर्तन और निकाह करने वाली भारतीय महिला सरबजीत कौर अब गंभीर कानूनी विवादों में घिर गई हैं। पाकिस्तान की कैद में मौजूद सरबजीत पर इमिग्रेशन नियमों और पाकिस्तानी कानून के उल्लंघन के आरोप में FIR दर्ज हो सकती है। लाहौर सत्र न्यायालय ने इस मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए संघीय जांच एजेंसी (FIA) से जवाब मांगा है ताकि उनकी अवैध मौजूदगी और वीजा उल्लंघन पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
वीजा नियमों का खुला उल्लंघन
स्रोतों के अनुसार, सरबजीत कौर नवंबर 2025 की शुरुआत में सिख तीर्थयात्रा के वीजा पर पाकिस्तान आई थीं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वीजा की अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी वह वापस भारत नहीं लौटीं और वहां अवैध रूप से रुकी रहीं। यह कृत्य न केवल तीर्थयात्रा वीजा की शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि पाकिस्तानी इमिग्रेशन कानूनों के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
नासिर हुसैन पर मदद का आरोप
याचिकाकर्ता महिंदर पाल सिंह, जो पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हैं, ने कोर्ट को बताया कि सरबजीत को पाकिस्तान में छिपाने में स्थानीय नागरिक नासिर हुसैन ने भूमिका निभाई। याचिकाकर्ता के वकील अली चंगेजी ने कोर्ट में दलील दी कि नासिर हुसैन ने सरबजीत को आश्रय और अन्य सहायता प्रदान कर उन्हें पाकिस्तान में बने रहने में मदद की, जो पाकिस्तानी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
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कोर्ट की कार्यवाही और FIA को आदेश
लाहौर की सेशन कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए FIA के इमिग्रेशन अधिकारियों को 30 जनवरी 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट और पक्ष रखने का आदेश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई भी 30 जनवरी को ही निर्धारित की गई है। इससे पहले याचिकाकर्ता ने लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने उन्हें निचली अदालत (सेशन कोर्ट) में अपील करने का निर्देश दिया था।
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तीर्थयात्रा वीजा की मर्यादा
याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि पाकिस्तानी कानून के तहत तीर्थयात्रा वीजा की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखी जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि पहले की गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें कोर्ट का रुख करना पड़ा। याचिका में सरबजीत को देश से निकालने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
