S Jaishankar ने अमेरिका में क्यों किया 670 किमी का सफर? 4 महीने बाद खुली सीक्रेट यात्रा की रिपोर्ट
S Jaishankar US Visit: अमेरिका में हवाई सेवाएं ठप होने पर विदेश मंत्री जयशंकर ने 670 किमी की सड़क यात्रा की। सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें लेविस्टन से मैनहट्टन पहुंचाया ताकि वे UN महासचिव से मिल सकें।
- Written By: प्रिया सिंह
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Jaishankar 670km US road trip report: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की सितंबर 2025 की एक गुप्त सड़क यात्रा का चौंकाने वाला खुलासा चार महीने बाद अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। अमेरिका में उड़ानों के अचानक ठप होने और सरकारी कामकाज बंद होने के कारण जयशंकर को लेविस्टन से मैनहट्टन तक का सफर बाईरोड तय करना पड़ा था। सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें 416 मील (670 किमी) तक सुरक्षित पहुंचाया ताकि वे संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ अपनी महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हो सकें। यह रिपोर्ट अमेरिकी राजनयिक सुरक्षा सेवा द्वारा सार्वजनिक की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में आने वाली बाधाओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर प्रकाश डालती है।
हवाई सेवाएं हुईं ठप
सितंबर में अमेरिका में तकनीकी कारणों और लॉकडाउन जैसी स्थितियों के चलते पूरे देश में वाणिज्यिक हवाई यात्राएं अचानक बंद हो गई थीं। इस संकट के दौरान एस जयशंकर को न्यूयॉर्क में एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेना था, लेकिन कोई भी उड़ान उपलब्ध नहीं थी। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने तब स्थिति को संभालते हुए सड़क मार्ग से यात्रा का विकल्प चुनने का बड़ा फैसला लिया।
सात घंटे का सफर
अमेरिकी एजेंटों ने कनाडा सीमा पर स्थित लेविस्टन-क्वीनस्टन ब्रिज पर विदेश मंत्री का औपचारिक स्वागत किया और वहां से सात घंटे लंबी ड्राइव शुरू की। सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने उन्हें मैनहट्टन तक पहुंचाया, जो उस समय के कूटनीतिक माहौल में एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। इस बाईरोड यात्रा के दौरान अमेरिकी राजनयिक सुरक्षा सेवा ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ताकि विदेशी मेहमान को कोई असुविधा न हो।
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महत्वपूर्ण राजनयिक बैठक
जयशंकर को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ एक अनिवार्य मुलाकात करनी थी, जिसे टाला नहीं जा सकता था। हवाई मार्ग अवरुद्ध होने के बावजूद इस 670 किमी की यात्रा ने यह सुनिश्चित किया कि भारत का पक्ष वैश्विक मंच पर समय पर रखा जाए। चार महीने बाद आई इस रिपोर्ट ने जयशंकर के इस कूटनीतिक संघर्ष और अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था के समन्वय की कहानी को दुनिया के सामने पेश किया है।
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कूटनीतिक प्रतिबद्धता की मिसाल
हवाई नेटवर्क ठप होने के बावजूद जयशंकर की यह यात्रा दर्शाती है कि भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंध कितने प्राथमिकता वाले हैं। सड़क मार्ग से 670 किलोमीटर का कठिन सफर तय करना कूटनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। अमेरिकी सुरक्षा सेवा ने भी इस आपातकालीन स्थिति में अपने प्रोफेशनल स्किल्स का परिचय देते हुए भारतीय विदेश मंत्री के कार्यक्रम को सफल बनाया।
