शांति के नाम पर ISI की खौफनाक चाल! PoK की पीस कमेटी में शामिल हुआ जैश कमांडर
Peace Committee Protests: PoK में चल रहे JAAC आंदोलन को कुचलने के लिए रावलाकोट भेजी गई पीस कमेटी में जैश कमांडर इलियास कश्मीरी के शामिल होने के खुलासे से पाकिस्तानी चाल बेनकाब हो गई है।
- Written By: प्रिया सिंह
पीओके आंदोलन पीस कमेटी (सोर्स- सोशल मीडिया)
PoK Protest Jaish Terrorist Joins Alleged Peace Committee Delegation In Rawalakot: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में इन दिनों वहां के नागरिक अधिकारों के लिए आंदोलन चला रहे हैं। इस जन आंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने अब नया पैंतरा आजमाया है। इसके तहत रावलाकोट में वार्ता के बहाने एक तथाकथित पीस कमेटी को वहां भेजा गया है। लेकिन इसके पर्दे के पीछे पाकिस्तान ने ऐसा खेल खेला है जिसने उसकी नीयत पूरी तरह उजागर कर दी।
दरअसल रावलाकोट भेजे गए इस प्रतिनिधिमंडल में जैश का कुख्यात आतंकी कमांडर इलियास कश्मीरी भी शामिल है। वहां से सामने आए एक वीडियो में वह साफ तौर पर कैमरे की नजरों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है। वार्ता के बहाने आतंकी कमांडर को भेजना साबित करता है कि वहां शांति के नाम पर बहुत बड़ा खेल चल रहा है। इस दल में आतंकी की मौजूदगी ने पाकिस्तान और ISI की पोल पूरी तरह खोल दी है।
शांति प्रतिनिधिमंडल में जैश का खूंखार आतंकी
बता दें कि इलियास कश्मीरी साधारण अपराधी नहीं है बल्कि वह भारत के खिलाफ कई आतंकी साजिशों में शामिल रहा है। उसने दावा किया था कि भारतीय सेना की कार्रवाई में मसूद अजहर के परिवार के लोग मारे गए थे। अब उसी आतंकी को वार्ताकार बनाकर भेजना दर्शाता है कि पाकिस्तान आंदोलन को बलपूर्वक दबाना चाहता है। इस खुलासे के बाद वहां के स्थानीय प्रदर्शनकारियों में पाकिस्तान की दमनकारी नीति के खिलाफ भारी गुस्सा है।
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लश्कर-ए-तैयबा का आंदोलनकारियों के खिलाफ दुष्प्रचार
इस घटनाक्रम में एक और पहलू यह है कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा भी अब मैदान में उतर आया है। लश्कर के आतंकी इस स्थानीय जन आंदोलन के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और इसके नेताओं को गद्दार घोषित कर रहे हैं। वे सोशल मीडिया के जरिए इस आंदोलन को बदनाम करने और लोगों को डराने का दुष्प्रचार अभियान चला रहे हैं। एक तरफ आतंकियों को वार्ताकार बनाना और दूसरी तरफ उनसे धमकी दिलवाना वहां की सेना की सोची-समझी साजिश है।
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PoK के इस मामले ने पाकिस्तान की आतंकपरस्त नीतियों और उसकी खुफिया एजेंसी की भूमिका को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। झूठा नाटक करने वाली इस पीस कमेटी की हकीकत सामने आने के बाद ISI के इस खेल पर गंभीर सवाल उठे हैं। वहां के नागरिक अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं और वे इस दमनकारी नीति के खिलाफ हैं। इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं क्योंकि वहां सेना की भूमिका को लेकर मामला गहरा गया है।
