एस. जयशंकर ने जपान में कहा, भारत को स्वतंत्रता के लिए करना पड़ सकता था और लंबा संघर्ष
भारत को स्वतंत्र बनाने वाले कई क्रांतिकारी वीर योद्धाओं में से एक महान पुरुष महात्मा गांधी को लेकर भारतीय विदेश मंत्री ने टोक्यो में अपने विचारों को प्रस्तुत किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गांधी के प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि गांधी के बिना भारत को स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए शायद और लंबा संघर्ष करना पड़ सकता था।
- Written By: नवनीत कुमार भारद्वाज
जपान दौरे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर (सोर्स - सोशल मीडिया)
टोक्यो: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जपान के टोक्यो शहर में रविवार को कहा कि महात्मा गांधी का सदैव के लिए संदेश संघर्ष, धुव्रीकरण (आकर्षक शक्ति) और रक्तपात दुनिया पर आज भी लागू होता है। समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलता है इसके लिए संघर्ष करना बहुत आवश्यक होता है। एस. जयशंकर ने टोक्यो के एडोगावा स्थित फ्रीडम प्लाजा में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करते हुए इस प्रमुख विचार को सबके सामने प्रस्तुत किया है।
जयशंकर ‘क्वाड’ (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए लाओस से दो दिवसीय यात्रा पर रविवार को जापान पहुंचे, वहां पहुंचने के बाद जापान में मौजूद भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने उनका स्वागत किया। जयशंकर ने कार्यक्रम के दौरान गांधी के शाश्वत संदेशों पर बात की। उन्होंने कहा मैं आज यह कहना चाहता हूं कि जब हम दुनिया में इतना संघर्ष, इतना तनाव, इतना ध्रुवीकरण, इतना खून-खराबा देख रहे हैं तो गांधी जी का यह संदेश बहुत महत्वपूर्ण है कि समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलते और कोई भी युग, युद्ध का युग नहीं होना चाहिए। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना 80 साल पहले था।
जयशंकर ने कहा, गांधी का दूसरा संदेश स्थिरता, जलवायु अनुकूलन, हरित विकास, हरित नीतियों के संदर्भ में विचार स्थापित रहा है। गांधी जी सतत यानी लगातार विकास के मूल पैगंबर थे, उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करके जीवन जीना के सबसे बड़े समर्थक थे। इसलिए गांधी जी का संदेश केवल सरकारों के लिए नहीं है, बल्कि इसे हर किसी को अपने निजी जीवन में अपनाना चाहिए। यह एक ऐसी चीज है, जिसके अनुसार हम अगली पीढ़ियों को आगे पहुंचाते हैं। गांधी जी निश्चित रूप से समावेशिता के समर्थक थे और इसी चीज को हम आज भारत और दुनिया भर में देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि एडोगावा वार्ड ने भारत के साथ संबंध मजबूत करने के लिए हमारे राष्ट्रपिता ‘महात्मा गांधी’ की इस अद्भुत प्रतिमा को स्थापित करने का फैसला किया है।
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जयशंकर ने राष्ट्रपिता को लेकर क्या कहा?
जयशंकर ने कहा गांधी हमारे राष्ट्रपिता हैं, लेकिन दुनिया के लिए वास्तव में एक वैश्विक प्रतीक हैं और हमें आज खुद से पूछना होगा कि इस प्रतिमा का यहां होना क्यों महत्वपूर्ण है? मैं इसके तीन कारण सोच सकता हूं। पहला यह कि महात्मा गांधी की उपलब्धियां उनके समय से ही बड़े प्रासंगिक बनी हुई हैं, समय बदलने के साथ-साथ उनका महत्व और भी बढ़ता जा रहा है। दूसरा कारण यह है कि महात्मा गांधी ने अपने जीवन और अपने कार्यों के माध्यम से जो संदेश दिया है वह कालातीत है। उन्होंने हमें जो सिखाया, वह तब भी महत्वपूर्ण था और आज भी महत्वपूर्ण है और तीसरी बात यह है कि मुझे बताया गया है कि इस जगह को ‘लिटिल इंडिया’ कहा जाता है। यह एक ऐसी जगह है जहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है। मैं भारत और जापान के बीच संबंधों को मजबूत करने के इससे बेहतर तरीके और इससे अधिक उपयुक्त अवसर के बारे में नहीं सोच सकता।
विदेश मंत्री ने कहा, गांधी के बिना भारत को स्वतंत्रता के लिए शायद और लंबा संघर्ष करना पड़ता या वह किसी अलग दिशा में चला जाता। जयशंकर ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता ने वास्तव में पूरी दुनिया को उपनिवेश मुक्त कर दिया, यह एक बहुत महत्वपूर्ण घटना का प्रारंभिक बिंदु था। उन्होंने कहा, जब भारत आजाद हुआ, एशिया के अन्य हिस्से आजाद हुए, अफ्रीका आजाद हुआ, लातिन अमेरिका आजाद हुआ…आज जब हम कहते हैं कि भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, दुनिया बदल रही है, यह बहुध्रुवीयता की ओर बढ़ रही है। जी-7 जी-20 बन गया है, तो एक तरह से यह सब गांधी जी द्वारा अतीत में किए गए कार्यों का परिणाम है।
