भूमध्य सागर में रूस का तेल टैंकर, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Arctic LNG Carrier Explosion Risk: जहां एक ओर पूरी दुनिया का ध्यान पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष की ओर है वहीं दूसरी ओर भूमध्य सागर की लहरों के बीच एक खौफनाक तबाही का साया मंडरा रहा है। रूस का एक विशालकाय तेल टैंकर ‘आर्कटिक मेटागाज’, जिस पर न तो कोई इंसान मौजूद है और न ही कोई नियंत्रण, इस वक्त एक ‘टिक-टिक’ करते बम की तरह लावारिस भटक रहा है। इस स्थिति ने इटली और माल्टा जैसे यूरोपीय देशों की रातों की नींद उड़ा दी है।
यह विशालकाय जहाज वर्तमान में पूरी तरह बेकाबू हो चुका है। जानकारी के अनुसार, एक घातक ड्रोन हमले के बाद इसके सभी 30 क्रू मेंबर्स अपनी जान बचाकर भाग चुके हैं। वर्तमान में यह जहाज काला पड़ चुका है, एक तरफ झुका हुआ है और इसकी बॉडी में एक बहुत बड़ा छेद हो गया है। इस ‘भूतिया जहाज’ की स्थिति इतनी नाजुक है कि इटली की सरकार ने इसे अपने किसी भी पोर्ट पर खड़ा करने से साफ इनकार कर दिया है, क्योंकि उन्हें डर है कि यह किसी भी क्षण एक बड़े धमाके के साथ फट सकता है।
रूस का दावा है कि 3 मार्च को भूमध्य सागर के बीचो-बीच इस जहाज पर समुद्री और हवाई ड्रोन्स के माध्यम से हमला किया गया था, जिसके लिए उसने यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है। हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई थी। जिससे यह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। गौरतलब है कि ‘आर्कटिक मेटागाज’ रूस की ‘शैडो फ्लीट’का हिस्सा है। यह उन पुराने जहाजों का बेड़ा है जिसे रूस अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों से बचने के लिए चोरी-छिपे तेल और गैस बेचने के लिए इस्तेमाल करता है।
विशेषज्ञों ने इस जहाज को ‘जलता हुआ टाइम बम’ करार दिया है क्योंकि इसमें तबाही का भारी सामान लदा है। जहाज में 60,000 मीट्रिक टन एलएनजी (LNG) भरी हुई है। यदि यह गैस लीक होती है, तो यह ‘बर्फीले बादल’ बना सकती है जो समुद्री जीवों को पल भर में खत्म करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, जहाज में 900 मीट्रिक टन डीजल भी मौजूद है जिसके समुद्र में फैलने से इटली और माल्टा के खूबसूरत तट हमेशा के लिए बर्बाद हो सकते हैं।
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फिलहाल यह लावारिस जहाज इटली के लिनोसा द्वीप से महज 20 समुद्री मील की दूरी पर बह रहा है। माल्टा की सरकार अपनी विशेषज्ञों की टीम के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस जहाज को किनारे लाना सुरक्षित होगा या इसे गहरे समुद्र में ही डुबो देना चाहिए। हालांकि, वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF) जैसे संगठनों ने कड़ी चेतावनी दी है कि इसे डुबोना पर्यावरण के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ होगा जिससे न केवल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र तबाह होगा बल्कि स्थानीय मछली पालन और पर्यटन उद्योग भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा।