Russia Taliban Pact: रूस तालिबान समझौता, क्या यूक्रेन युद्ध में तबाही मचाएंगे अफगानी लड़ाके?

Russia Taliban Pact: रूस और अफगानिस्तान के बीच एक गुप्त सैन्य समझौता हुआ है। इस रूस और तालिबान समझौते के बाद यूक्रेन युद्ध में अफगान लड़ाकों के शामिल होने की अटकलें तेज होने से टेंशन बढ़ गई हैं।
Russia Taliban Pact: Secret Military Deal Raises Speculations About Afghan Fighters In Ukraine War
रूस तालिबान समझौता (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Russia Taliban Pact Ukraine Impact: रूस और अफगानिस्तान के बीच 80 के दशक की जोरदार लड़ाई के बाद अब दोनों देशों के रिश्ते बहुत तेजी से बदल रहे हैं। रूस ने हालिया महीनों में काबुल से अपने संबंध बेहतर किए हैं और तालिबान सरकार ने भी उनका बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया है। तालिबान को आतंकवादी संगठन की सूची से हटाने के बाद रूस ने इस हफ्ते अफगानिस्तान से बड़ा सैन्य समझौता किया है।

इस गुप्त और अहम समझौते के बाद ऐसी गंभीर अटकलें लगाई जा रही हैं कि अफगान तालिबान के लड़ाके यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर सकते हैं। यूरेशियन टाइम्स के मुताबिक तालिबान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह मॉस्को के साथ अपने इस सहयोग को बहुत ही महत्वपूर्ण मानता है। हालांकि अभी तक किसी भी देश ने इस बड़े सैन्य सहयोग समझौते का पूरा ब्योरा दुनिया के सामने जारी नहीं किया है।

उत्तर कोरिया जैसा समझौता

रूस ने इससे पहले 2024 में उत्तर कोरिया के साथ भी नाटो की तर्ज पर एक अहम रक्षा समझौता किया था। इसके बाद हजारों उत्तर कोरियाई सैनिकों के रूस के कुर्स्क क्षेत्र में लड़ने की अहम बात सामने आई थी। उत्तर कोरिया ने मॉस्को को भारी मात्रा में गोला-बारूद और लंबी दूरी की तोपें भी मुहैया कराई थीं। अफगानिस्तान के साथ इस बड़े समझौते के बाद कुछ रक्षा विशेषज्ञ एक बहुत ही चौंकाने वाला दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि रूस के कुर्स्क में मौजूद उत्तर कोरियाई सैनिक यूक्रेन युद्ध के लिए तालिबान लड़ाकों की भर्ती कर सकते हैं। हालांकि कुछ अन्य विशेषज्ञों का यह भी स्पष्ट मानना है कि ऐसी किसी भी व्यवस्था की संभावना बहुत ज्यादा नहीं है।

हथियारों का व्यापार मुश्किल

रूस की आर्थिक स्थिति अभी इतनी तंग है कि वह तालिबान सरकार को बिल्कुल भी मुफ्त सैन्य सहायता नहीं दे सकता। वहीं दूसरी ओर तालिबान सरकार के पास भी बड़ी मात्रा में नए सैन्य उपकरण खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। इसलिए वह मॉस्को की नजर में एक बहुत महत्वपूर्ण सैन्य व्यापारिक साझेदार फिलहाल नहीं बन सकता है।

थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार रूस तालिबान से हथियारों के मामले में किसी बड़ी मदद की उम्मीद नहीं कर सकता। रूस का तालिबान के साथ यह सैन्य समझौता उसको एशिया में अपने पश्चिमी-विरोधी बड़े गठबंधन का विस्तार करने में पूरी मदद करेगा। इस मजबूत गठबंधन में पहले से ही चीन, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे कई बड़े देश मुख्य रूप से शामिल हैं।

तालिबान के लिए बड़ा फायदा

रूस और तालिबान दोनों ही अफगानिस्तान में अमेरिका के किसी भी सैन्य बेस को बनाए रखने के पूरी तरह से खिलाफ हैं। इस अहम समझौते से तालिबान को रूस के रूप में एक बहुत ही ताकतवर और भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय दोस्त मिल गया है। मॉस्को के साथ यह मिलिट्री समझौता तालिबान को अपना अंतरराष्ट्रीय अलगाव खत्म करने के बड़े दावे में भी मदद करेगा।

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