क्यूबा के साथ खड़ा हुआ रूस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Russia Supports Cuba Oil Crisis: तीन महीनों के लंबे इंतजार और गहरे अंधेरे में डूबे क्यूबा के लिए राहत की पहली किरण रूस से आई है। रूसी झंडे वाला तेल टैंकर ‘अनातोली कोलोदकिन’ क्यूबा के सबसे बड़े ईंधन भंडारण बंदरगाह मातान्जस पहुंच गया है। यह खेप ऐसे समय में आई है जब क्यूबा अपनी अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के पूर्ण पतन के कगार पर खड़ा है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने एक साप्ताहिक ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि रूस क्यूबा को सहायता देना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि क्यूबा कैरिबियन में हमारा सबसे करीबी दोस्त और साझेदार है और हमें उसे छोड़ने का कोई अधिकार नहीं है। इसके साथ ही रूस ने अमेरिका से एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र पर लगाई गई ऊर्जा नाकेबंदी को तुरंत हटाने की मांग भी की है।
क्यूबा में ऊर्जा का यह भीषण संकट इस साल जनवरी में तब शुरू हुआ जब अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पद से हटा दिया। मादुरो क्यूबा के प्रमुख सहयोगी थे और देश की तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा वेनेजुएला से ही आता था। उनकी विदाई के बाद क्यूबा में ईंधन की भारी किल्लत हो गई जिससे 1 करोड़ की आबादी वाले इस देश में रोजाना ब्लैकआउट होने लगे और अस्पताल, परिवहन और कृषि उत्पादन ठप होने की कगार पर पहुंच गए।
दिलचस्प बात यह है कि इस रूसी टैंकर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने गुजरने की अनुमति दी है। ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्हें रूस द्वारा द्वीप पर तेल भेजने से कोई समस्या नहीं है और उन्होंने इसे विशुद्ध रूप से ‘मानवीय कारणों’ से अनुमति दी है।
हालांकि, इस अनुमति के साथ ट्रंप ने क्यूबा के नेतृत्व पर कड़ा प्रहार भी किया। उन्होंने कहा कि क्यूबा खत्म हो चुका है। वहां का शासन बहुत बुरा और भ्रष्ट है। चाहे उन्हें तेल का एक जहाज मिले या न मिले इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ईंधन क्यूबा की सरकार को ट्रंप प्रशासन के बढ़ते दबाव के बीच थोड़ी राहत जरूर देगा।
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रूसी जहाज अपने साथ 730,000 बैरल कच्चा तेल लेकर आया है। आंकड़ों के लिहाज से क्यूबा अपनी जरूरत का केवल 40 प्रतिशत ईंधन खुद पैदा करता है और बाकी के लिए आयात पर निर्भर है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस खेप से लगभग 180,000 बैरल डीजल का उत्पादन किया जा सकता है जो क्यूबा की दैनिक मांग को केवल 9 से 10 दिनों तक पूरा करने के लिए पर्याप्त है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या रूस की यह मदद क्यूबा को इस स्थायी संकट से निकाल पाएगी या यह केवल एक अल्पकालिक मरहम साबित होगी।