रूस ने कीव पर की मिसाइल और ड्रोन की बरसात, चार की मौत (सोर्स- सोशल मीडिया)
Massive Russian Drone Attack On Kyiv: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है जब रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया। मिडिल ईस्ट में चल रही अशांति के बीच पुतिन की सेना ने अपनी पूरी ताकत झोंकते हुए यूक्रेन के रिहायशी इलाकों और ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया है। इस ताजा हमले ने न केवल जान-माल का भारी नुकसान किया है बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े संकट की ओर धकेल दिया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने वैश्विक समुदाय से इस तबाही को रोकने के लिए तत्काल सैन्य और कूटनीतिक मदद की गुहार लगाई है।
शनिवार की सुबह यूक्रेन के नागरिकों के लिए काल बनकर आई जब रूसी सेना ने राजधानी कीव को निशाना बनाते हुए हमला किया। राष्ट्रपति जेलेंस्की के अनुसार रूसी सेना ने सिर्फ एक रात के भीतर लगभग 430 ड्रोन और 68 मिसाइलें यूक्रेन पर दागी हैं। इस हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कीव के चार मुख्य जिले धमाकों की आवाज से पूरी तरह दहल उठे।
धमाकों के बाद आसमान में केवल धुआं और चारों तरफ मलबे के ढेर नजर आ रहे थे जिससे लोगों में दहशत फैल गई। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि हमले में अब तक 4 लोगों की जान जा चुकी है और बचाव कार्य लगातार जारी है। अस्पताल में भर्ती 15 से ज्यादा घायलों में से कुछ की स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है और डॉक्टर संघर्ष कर रहे हैं।
रूस ने इस बार जानबूझकर केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं बल्कि रिहायशी इलाकों और बिजली घरों को भी अपना निशाना बनाया। कई महत्वपूर्ण पावर प्लांट पूरी तरह तबाह हो गए हैं जिसके कारण कड़ाके की ठंड में लोग बिजली के बिना रह रहे हैं। पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है जिससे आम नागरिकों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मिसाइलें रिहायशी इलाकों के साथ-साथ स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय दुकानों पर भी गिरी हैं जिससे भारी आर्थिक क्षति हुई है। यूक्रेन के सुमी शहर से भी हृदयविदारक तस्वीरें सामने आई हैं जहां एक बड़ी इमारत में आग लगने से कई घर जल गए। यह हमला स्पष्ट रूप से नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट करने और लोगों के मनोबल को तोड़ने के उद्देश्य से किया गया है।
हैरानी की बात यह है कि यह भीषण हमला उस समय हुआ जब अमेरिका की मध्यस्थता से शांति वार्ता की उम्मीदें जगी थीं। हालांकि मिडिल ईस्ट की जंग में उलझे होने के कारण अमेरिका ने फिलहाल इस महत्वपूर्ण बातचीत को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया है। जेलेंस्की का मानना है कि पुतिन वास्तव में शांति नहीं चाहते बल्कि वे तो बस पूरे यूक्रेन को बर्बाद करना चाहते हैं।
राष्ट्रपति ने दुनिया के शक्तिशाली देशों से अपील की है कि वे रूस पर कड़ा आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाना शुरू करें। उनका कहना है कि अगर अभी रूस को नहीं रोका गया तो यह खून-खराबा कभी खत्म नहीं होगा और तबाही बढ़ती जाएगी। शांति की बातचीत पर इस हमले ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है और तनाव चरम पर पहुंच गया है।
यूक्रेन पर हुए इस अमानवीय हमले के बाद जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने रूस के प्रति अत्यंत कड़ा रुख अपना लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि रूस को युद्ध रोकने पर मजबूर करने के लिए अब और अधिक सख्त पाबंदियां लगानी होंगी। मर्ज के अनुसार जब तक यह युद्ध पूरी तरह खत्म नहीं होता तब तक रूसी तेल और गैस पर लगी रोक नहीं हटेगी।
जर्मनी का मानना है कि रूसी संसाधनों पर पाबंदी हटाना एक बहुत बड़ी गलती साबित होगी जो पुतिन को और आक्रामक बनाएगी। इस रुख ने यूरोपीय देशों के बीच रूस को अलग-थलग करने की रणनीति को एक नई दिशा और मजबूती प्रदान की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस युद्ध को समाप्त करने के लिए नए विकल्पों और सख्त आर्थिक उपायों पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
यह भी पढ़ें: नेपाल के गोरखा में दर्दनाक सड़क हादसा… मनकामना मंदिर से लौट रहे सात भारतीय श्रद्धालुओं की मौत हुई
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस खूनी संघर्ष को शुरू हुए अब 4 साल का लंबा समय पूरा हो चुका है। इन वर्षों में कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की कोशिशें की गईं और कई देशों ने मध्यस्थता करने का प्रयास किया। लेकिन धरातल पर अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला है और युद्ध की आग लगातार भड़कती ही जा रही है।
आज भी निर्दोष लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और कभी हंसते-खेलते शहर अब खंडहरों के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। यूक्रेन की जनता इस समय एक अभूतपूर्व मानवीय संकट का सामना कर रही है जहां भोजन और सुरक्षा की भारी कमी है। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन इस स्थिति पर चिंता जता रहे हैं लेकिन युद्ध विराम की संभावना अब भी काफी दूर दिखती है।