
वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Zelenskyy invited to Moscow Russia: रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक बार फिर बड़ी कूटनीतिक हलचल शुरू हुई है। रूस ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए आधिकारिक तौर पर मॉस्को आने का न्योता फिर से दिया है। यह आमंत्रण ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संकट को सुलझाने के लिए लगातार सक्रिय प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में दोनों देशों और अमेरिका के बीच पहली त्रिपक्षीय वार्ता भी संपन्न हुई है।
रूस ने यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव तब दिया जब दोनों देशों के बीच युद्ध में मारे गए सैनिकों के शवों का आदान-प्रदान हुआ था। हालांकि मॉस्को ने उन अफवाहों पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि इस शांति प्रक्रिया में अब बहुत अच्छी चीजें हो रही हैं और परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को मॉस्को आने का न्योता दिया है बल्कि पिछले साल भी ऐसी कोशिश की गई थी। उस समय जेलेंस्की ने रूस के इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा था कि वह उस देश की राजधानी नहीं जा सकते जो उनके देश पर मिसाइलें दाग रहा है। जेलेंस्की ने तब पुतिन को कीव आने का सुझाव दिया था लेकिन अब अबू धाबी में हुई वार्ता के बाद बातचीत के रुख में कुछ प्रगति जरूर देखी गई है।
किसी भी संभावित शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा यह है कि युद्ध के बाद कौन सा क्षेत्र किसके नियंत्रण में रहेगा और वहां कौन तैनात होगा। यूक्रेन में अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों की उपस्थिति और रूस के कब्जे वाले ज़ापोरिज़्ज़िया परमाणु ऊर्जा संयंत्र के भविष्य को लेकर भी दोनों पक्षों में गहरा मतभेद है। रूस चाहता है कि यूक्रेनी सेना डोनेट्स्क क्षेत्र के उन 20 प्रतिशत हिस्सों से पीछे हट जाए जिस पर अभी रूसी सेना का कब्जा नहीं है।
यूक्रेन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह रूस को ऐसा कोई भी क्षेत्र उपहार में नहीं देना चाहता जिसे रूस ने युद्ध के मैदान में अपनी ताकत से नहीं जीता है। यूक्रेन को डर है कि ऐसे क्षेत्र भविष्य में रूसी सेनाओं के लिए उसके देश में और अंदर तक घुसने के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर सकते हैं। इस बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका द्वारा यूक्रेन को दी जाने वाली किसी भी सुरक्षा गारंटी की व्यवहार्यता पर अपना गहरा संदेह जताया है।
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शांति बहाली के इन प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडल अब एक फरवरी को अबू धाबी में दोबारा बैठक करने वाले हैं। यद्यपि पिछले हफ्ते हुई त्रिपक्षीय वार्ता में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है लेकिन अभी भी दोनों पक्षों के दावों और शर्तों में काफी अंतर बना हुआ है। पूरी दुनिया की निगाहें अब एक फरवरी की बैठक पर टिकी हैं क्योंकि यह तय करेगा कि चार साल से जारी यह विनाशकारी युद्ध अब रुकेगा या नहीं।
Ans: रूस ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का आधिकारिक न्योता दिया है।
Ans: हां, जेलेंस्की ने पिछले साल मॉस्को का न्योता ठुकरा दिया था और इसके बदले पुतिन को कीव आने का सुझाव दिया था।
Ans: रूस और यूक्रेन के वार्ता प्रतिनिधिमंडल अब एक फरवरी को अबू धाबी में दोबारा मुलाकात करेंगे।
Ans: रूस चाहता है कि यूक्रेनी सेना डोनेट्स्क क्षेत्र के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से से पीछे हट जाए जिस पर रूस का नियंत्रण नहीं है।
Ans: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को खत्म करवाने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहे हैं और शांति प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं।






