ब्रिक्स में जमेगी रूस, भारत और चीन की तिकड़ी, समिट से पहले रूसी विदेश मंत्री का आया बयान
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का ब्रिक्स समिट से पहले अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को जलाने वाला बयान आया है। उन्होंने भारत, रूस और चीन (RIC) तिकड़ी की बात की। उन्होंने उसके अस्तित्व की पुष्टि की।
- Written By: साक्षी सिंह
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव
मॉस्को: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का ब्रिक्स समिट से पहले अमेरिका समेत पश्चिमी देशों को जलाने वाला बयान आया है। उन्होंने भारत, रूस और चीन (RIC) तिकड़ी की बात की। उन्होंने उसके अस्तित्व की पुष्टि की। साथ ही कहा कि कई परिस्थितियों के कारण कुछ समय तक बैठक न करने के बावजूद तिकड़ी एक स्वतंत्र तंत्र बनी हुई है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का ये बयान ठीक ब्रिक्स समिट के पहले आया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर रूस के कजान शहर में आयोजित हो रहे 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे। इस साल पीएम मोदी की यह दूसरी रूस यात्रा होगी।
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पीएम मोदी ब्रिक्स समिट में भाग लेने आज रूसी दौरे पर रवाना होंगे। इससे पहले उन्होंने जुलाई में रूस का दौरा किया था। इंटरव्यू के दौरान लावरोव ने कहा कि ब्रिक्स वैश्विक अर्थव्यवस्था में लंगे समय से चल नहे बदलावों एक का प्रतीक है। रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि एक साल से ज्यादा समय से और कई दशकों से, वैश्विक विकास का केंद्र यूरो अटलांटिक क्षेत्र से ऐशिया- प्रशांत और यूरेशिया में स्थानांतरित हो रहा है।
22-23 अक्टूबर को ब्रिक्स समिट
रूस के कजान शहर में दो दिवसीय 22-23 अक्टूबर को ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन होगा। संगठन के विस्तार के बाद यह इसका पहला शिखर सम्मेलन है। ब्रिक्स दुनिया की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को एक साथ लाने वाला एक महत्वपूर्ण समूह है। ईरान, मिस्र, इथियोपिया और यूएई इसी साल इस संगठन में शामिल हुए हैं।
24 देशों के नेता ब्रिक्स समिट में लेंगे हिस्सा
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा कजान में ब्रिक्स सदस्य देशों के अपने समकक्षों के साथ बैठक कर सकते हैं। इसके आलावा आमंत्रित नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करने की भी उम्मीद है। रूसी राष्ट्रपति के सहायक यूरी उशाकोव के मुताबिक, कजान में आयोजित ब्रिक्स समिट में 24 देशों के नेता और कुल 32 देशों के प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे। इस तरह रूस में आयोजित अब तक का यह सबसे बड़ा विदेश नीति का कार्यक्रम बन जाएगा।
