रूस और चीन UNSC में वीटों किया, सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया) 
विदेश

UNSC में शांति की आखिरी कोशिश भी नाकाम, रूस और चीन के वीटो से गिरा प्रस्ताव; ईरान में तबाही का काउंटडाउन शुरू!

Russia China Veto UN: होर्मुज को खोलने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में लाए गए प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो कर दिया है। ट्रंप की डेडलाइन से ठीक पहले शांति की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो गई है।

अमन उपाध्याय

Russia China Veto UN Hormuz Iran War: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर दुनिया को बड़ी निराशा हाथ लगी है। ईरान द्वारा बंद किए गए रणनीतिक जलमार्ग Strait of Hormuz को फिर से खोलने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में लाया गया प्रस्ताव गिर गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई 8:00 बजे की 'मिडनाइट डेडलाइन' से कुछ ही घंटे पहले हुई इस वोटिंग में रूस और चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को खारिज कर दिया जिससे सैन्य टकराव की आशंका अब और भी प्रबल हो गई है।

रूस-चीन का वीटो

बहरीन की ओर से सुरक्षा परिषद में लाए गए इस प्रस्ताव का उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था। वोटिंग के दौरान 15 सदस्यीय परिषद में से 11 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। हालांकि, रूस और चीन ने इस पर वीटो कर दिया, जबकि कोलंबिया और पाकिस्तान ने मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया। रूस और चीन का तर्क है कि वे इस रणनीतिक जलमार्ग को खोलने के लिए किसी भी प्रकार के बल प्रयोग या सैन्य कार्रवाई के सख्त खिलाफ हैं।

कमजोर किया गया प्रस्ताव

शुरुआत में बहरीन द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में देशों को 'सभी जरूरी उपायों' के इस्तेमाल का अधिकार देने की बात कही गई थी, जिसका अर्थ संयुक्त राष्ट्र की भाषा में सैन्य कार्रवाई होता है। रूस, चीन और फ्रांस के विरोध के बाद इसमें बदलाव कर 'आक्रामक सैन्य कार्रवाई' के संदर्भ हटा दिए गए और केवल 'रक्षात्मक उपायों' की अनुमति दी गई थी। संशोधित प्रस्ताव में केवल अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के हमलों को रोकने की मांग की गई थी लेकिन रूस और चीन ने इस पर भी असहमति जताई।

होर्मुज संकट से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चोट

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के लिए कितना महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। जंग की शुरुआत से ही ईरान ने इस मार्ग पर पाबंदियां लगा रखी हैं जिसके कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

दरअसल, 28 फरवरी से अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों के जवाब में ईरान ने न केवल होर्मुज को बंद किया है, बल्कि कई खाड़ी देशों में नागरिक बुनियादी ढांचों और होटलों को भी निशाना बनाया है।

ट्रंप की 'सभ्यता खत्म' करने वाली चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र में इस कूटनीतिक विफलता के बाद अब सबकी नजरें व्हाइट हाउस पर हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि होर्मुज नहीं खोला गया तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर भीषण हमले किए जाएंगे। ट्रंप ने इसे 'एक सभ्यता का अंत' तक कह दिया है, जिससे संकेत मिलते हैं कि अमेरिका अब सीधी सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है। अब जबकि शांति की आखिरी उम्मीद भी खत्म हो चुकी है पूरी दुनिया सांसें थामकर ट्रंप की डेडलाइन के खत्म होने का इंतजार कर रही है।

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