सेमीकंडक्टर से लेकर डिफेंस तक… रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर साथ आए भारत और अमेरिका, चीन में मची खलबली
Quad Meeting 2026: भारत और अमेरिका ने महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन सुरक्षित करने के लिए रणनीतिक समझौता किया है। इसका मकसद सेमीकंडक्टर और रक्षा जैसे क्षेत्रों में चीन का दबदबा कम करना है।
- Written By: अक्षय साहू
भारत और अमेरिका के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर अहम समझौता (सोर्स- सोशल मीडिया)
India-US Critical Minerals Deal: भारत और अमेरिका ने मंगलवार को एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिज और रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है। यह वही मिनरल्स हैं जिनका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और हाईटेक रक्षा उपकरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है। दोनों देश इस समझौते के जरिए रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों को कम करना चाहते हैं।
भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया में चीन के इन अहम संसाधनों पर दबदबे को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जाता है कि इससे चीन को वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने की ताकत मिल जाती है।
रुबियो-जयशंकर की मौजूदगी में हुआ समझौता
यह समझौता क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान हुआ, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा आज हम भारत-अमेरिका के बीच एक ऐसा फ्रेमवर्क साइन कर रहे हैं, जिसका मकसद क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स की सप्लाई को सुरक्षित करना है।
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जयशंकर ने कहा कि हमने इस पर क्वाड बैठक में भी चर्चा की है। चाहे हम इसे दो देशों के बीच करें, क्वाड के जरिए करें या समान सोच वाले देशों के बड़े समूह के तौर पर, समय की जरूरत को देखते हुए यह जरूरी और अहम है। उन्होंने बताया कि इस फ्रेमवर्क का मकसद पूरे सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाना है, जिसमें खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और इससे जुड़े निवेश शामिल हैं।
भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार: मार्को रुबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह समझौता इसलिए किया गया है, क्योंकि भारत और अमेरिका का साझा रणनीतिक हित है। उनका कहना है कि मजबूत और इनोवेशन पर आधारित अर्थव्यवस्थाएं ऐसी चीजों पर निर्भर नहीं रह सकतीं, जो सिर्फ एक ही देश या एक ही स्रोत से मिलती हों। वरना वह देश इसे दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में भारत यात्रा के दौरान उन्होंने कई बार भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के महत्व पर बात की है। यह समझौता उसी साझेदारी का एक ठोस उदाहरण है। रुबियो ने यह भी बताया कि इस समझौते की नींव 4 फरवरी को रखी गई थी, जब भारत ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में हिस्सा लिया था।
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भारत पैक्स सिलिका का हिस्सा
मार्को रुबियो ने भारत द्वारा ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर करने का भी जिक्र किया। यह अमेरिका के नेतृत्व में बना एक समूह है, जिसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई चेन तैयार करना है। अमेरिका ने इसे खास तौर पर क्रिटिकल मिनरल्स पर चीन के प्रभाव को कम करने के लिए बनाया है।
Frequently Asked Questions
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Que: भारत-अमेरिका ने रेयर अर्थ मिनरल्स समझौता क्यों किया है?
Ans: यह समझौता रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, ताकि सेमीकंडक्टर, EV, सोलर और रक्षा उद्योग चीन पर कम निर्भर रहें।
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Que: रेयर अर्थ मिनरल्स समझौते से भारत को क्या फायदा होगा?
Ans: भारत को खनन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और निवेश में सहयोग मिलेगा। इससे हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, रोजगार और सप्लाई चेन मजबूत करने में मदद होगी।
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Que: पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन क्या है?
Ans: पैक्स सिलिका अमेरिका के नेतृत्व वाला समूह है, जो AI, सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद वैश्विक सप्लाई चेन बनाने पर काम करता है।
