क्रूड ऑइल पाइपलाइन (सोर्स-सोशल मीडिया) 
विदेश

UAE का मेगा प्लान! नई पाइपलाइन से बाईपास होगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानिए भारत के लिए इसके क्या हैं मायने

UAE Oil Pipeline: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट इस समय बंद पड़ा हुआ है। इससे निपटने के लिए UAE नई पाइपलाइन बना रहा है। यह पाइपलाइन भारत के लिए फायदेमंद साबित होगी।

प्रिया सिंह

India UAE Oil Pipeline: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय बंद पड़ा हुआ है। इस भयंकर तनाव से पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट और तेल की कीमतों में भारी उछाल का खतरा पैदा हो गया है। इसी संकट से बचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेल रहा है। यूएई ने अपनी पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन के निर्माण कार्य में अब बहुत ज्यादा तेजी ला दी है।

यह नई पाइपलाइन कच्चे तेल को सीधे ओमान की खाड़ी के किनारे फुजैरा बंदरगाह तक बहुत सुरक्षित तरीके से पहुंचाएगी। इस पाइपलाइन के बनने से संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बाईपास करना मुमकिन हो जाएगा। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और वह खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के पूरा होने से भारत को सुरक्षित और बिना रुकावट वाला तेल मिलना सुनिश्चित होगा।

2027 तक काम होगा पूरा

अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी यानी ADNOC अपनी इस नई पश्चिम-पूर्व पाइपलाइन के काम को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि साल 2027 तक इस विशाल पाइपलाइन का काम पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। इस परियोजना के चालू होने से फुजैरा के रास्ते कच्चे तेल के सुरक्षित निर्यात की क्षमता सीधे दोगुनी हो जाएगी। यह रणनीतिक बंदरगाह यूएई को अपना तेल वैश्विक बाजारों तक बहुत आसानी और सुरक्षा से पहुंचाने में भारी मदद करेगा।

यूएई का बढ़ता प्रभाव

यूएई ने हाल ही में तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक को छोड़ दिया है जिससे उसका स्वतंत्र प्रभाव काफी बढ़ा है। ओपेक छोड़ने के बाद इस नई पाइपलाइन से यूएई के ऊर्जा निर्यात को बहुत ज्यादा बढ़ावा मिलने की पूरी उम्मीद है। ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ अब सिर्फ लगातार तेल उत्पादन करने की क्षमता तक ही बिल्कुल भी सीमित नहीं रह गया है। इसका सीधा संबंध परिवहन मार्गों, पहुंच और वैकल्पिक व्यवस्थाओं से है क्योंकि दुनिया की ऊर्जा संकरे समुद्री मार्गों से गुजरती है।

होर्मुज को बाईपास का इतिहास

होर्मुज जलडमरूमध्य को बाईपास करने का यह विचार संयुक्त अरब अमीरात के लिए कोई नया या अचानक लिया गया फैसला नहीं है। साल 2012 से ही यूएई अपनी अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन का लगातार और बहुत ही सफल संचालन कर रहा है। यह पुरानी पाइपलाइन देश के अंदरूनी हबशान तेल क्षेत्रों से ओमान की खाड़ी पर स्थित फुजैरा तक कच्चा तेल आसानी से पहुंचाती है। नई पाइपलाइन इसी दिशा में यूएई की ऊर्जा निर्यात क्षमता को क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच मजबूत करने का एक बहुत बड़ा प्रयास है।

भारत के लिए बहुत बड़ा महत्व

भारत अपनी कच्चे तेल की भारी जरूरत का 85 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा सिर्फ आयात के जरिए ही पूरी तरह से पूरा करता है। यूएई की यह नई पाइपलाइन भारत के लिए तेल आयात को बहुत अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने का काम करेगी। होर्मुज में किसी भी रुकावट से माल ढुलाई दर, बीमा की लागत और तेल की कीमत काफी ज्यादा और तेजी से बढ़ जाती है। पाइपलाइन से तेल आपूर्ति होने पर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को हमेशा स्थिर रखने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।

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