Putin का भारत दौरा: रक्षा समझौते, तेल व्यापार और आर्थिक संतुलन पर बड़ी उम्मीदें
Putin India Visit: पुतिन की भारत यात्रा में रक्षा, तेल खरीद, द्विपक्षीय व्यापार और तकनीकी सहयोग पर फोकस रहेगा। दोनों देश आर्थिक संतुलन और अमेरिका-चीन समीकरणों के बीच साझेदारी मजबूत की कोशिश में हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (डिजाइन)
Russia India Defense Deal: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा कई अहम सवालों और बड़ी उम्मीदों के बीच शुरू हुआ है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत रहे हैं। लेकिन इस यात्रा में आर्थिक संतुलन, व्यापार समझौते और ऊर्जा साझेदारी सबसे बड़ी प्राथमिकता मानी जा रही है। दुनिया की बदलती राजनीति के बीच भारत और रूस कैसे अपने रिश्ते को आगे बढ़ाएंगे, यह यह दौरा तय करेगा।
पुतिन का भारत दौरा, दोनों देशों के सामने चुनौतियां और उम्मीदें
भारतीय विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारत रूस के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करना चाहता है। भारत रूस से ज्यादा आयात करता है लेकिन निर्यात बहुत कम है, जिससे व्यापार का संतुलन बिगड़ा हुआ है। इसी मुद्दे पर रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने भी कहा कि रूस भारत से अधिक सामान खरीदना चाहता है।
रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मंचों पर सहयोग
भारत और रूस ने अपने संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया है। दोनों G20, BRICS, SCO और UN जैसे मंचों पर मिलकर काम करते हैं। रूस भारत की यूएन सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट की मांग का समर्थन करता आया है। युद्ध की स्थिति के बाद यह पुतिन की भारत पहली यात्रा है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 में मॉस्को गए थे।
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रक्षा सौदों पर बातचीत, लेकिन घोषणा की संभावना कम
रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि शिखर सम्मेलन में रक्षा समझौतों की घोषणा की परंपरा नहीं होती, इसलिए कोई बड़ा एलान संभव नहीं है। हालांकि, एसयू-57 फाइटर जेट और एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम पर नेताओं के बीच गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। पाकिस्तान-चीन की सैन्य साझेदारी बढ़ने के बाद भारत के लिए यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण हो गया है।
रक्षा क्षेत्र में चुनौतियां
भारत रूस से एस-400 की बाकी डिलीवरी तेजी से चाहता है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अटैक सबमरीन की सप्लाई में देरी भी चिंता का विषय है। एसआईपीआरआई के अनुसार भारत आज भी 36% रक्षा आयात रूस से करता है, जबकि पहले यह 72% था।
तेल और खाद पर निर्भरता
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया, जिससे तेल आयात 52 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अमेरिकी टैरिफ बढ़ने से भारत पर दबाव हुआ, लेकिन भारत ने इसे व्यावसायिक फैसला बताया। खाद के क्षेत्र में भारत रूस से 4.7 मिलियन टन आयात कर चुका है, जो रिकॉर्ड है।
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व्यापार संतुलन की चुनौती
द्विपक्षीय व्यापार 68.7 अरब डॉलर पर है, लेकिन इसमें भारत का निर्यात सिर्फ 4.9 अरब डॉलर है। भारत IT, दवाइयां, कृषि उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स को रूस भेजना चाहता है और इसके लिए FTA पर बातचीत जारी है।
