रूस के खतरे से सतर्क पोलैंड: सीमा पर बारूदी सुरंग बिछाने का किया बड़ा एलान
Russia Threat Alert: पोलैंड ने रूस और बेलारूस की सीमा पर सुरक्षा के लिए बारूदी सुरंग बिछाने का एलान किया है। रूस के आक्रामक इरादों को देखते हुए पोलैंड अब अंतरराष्ट्रीय ओटावा संधि से भी अलग हो गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
रूस के खतरे से सतर्क पोलैंड (सोर्स-सोशल मीडिया)
Poland Border Security Landmines: रूस से बढ़ते खतरे को देखते हुए पोलैंड ने अपनी सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने का निर्णय लिया है। देश के उप रक्षामंत्री पावेल जालेव्स्की ने सीमा पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बारूदी सुरंग बिछाने का आधिकारिक एलान किया है। यह कदम नाटो के पूर्वी हिस्से को सुरक्षित करने और भविष्य में किसी भी रूसी आक्रमण को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। अब पोलैंड विवादित हथियारों पर प्रतिबंध लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय ओटावा संधि से भी आधिकारिक तौर पर पूरी तरह अलग हो गया है।
सीमा पर रक्षात्मक ढांचा
पोलैंड अपने उत्तरी हिस्से में रूस और पूर्व में बेलारूस के साथ लगने वाली लंबी सीमाओं पर रक्षात्मक संरचना का निर्माण कर रहा है। उप रक्षामंत्री पावेल जालेव्स्की के अनुसार सुरक्षा की दृष्टि से सीमा पर बारूदी सुरंग बिछाना वर्तमान परिस्थितियों में बहुत जरूरी हो गया है। पोलैंड को अपनी सीमाओं की रक्षा करने की आवश्यकता है क्योंकि रूस ने अपने पड़ोसियों के प्रति हमेशा बहुत आक्रामक इरादे रखे हैं।
ओटावा संधि से हुआ अलग
पोलैंड अब वर्ष 1997 की प्रसिद्ध ओटावा संधि से आधिकारिक तौर पर अलग हो गया है जो बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध लगाती थी। यह अंतरराष्ट्रीय समझौता हस्ताक्षरकर्ताओं को सुरक्षा के लिए बारूदी सुरंग रखने या उन्हें जमीन में बिछाने से पूरी तरह से रोकता था। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली हुई परिस्थितियों में पोलैंड ने अब अपनी पुरानी रक्षात्मक नीतियों का पूरी तरह पुनर्मूल्यांकन करने का फैसला किया है।
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सुरंगों के निर्माण की योजना
पोलैंड ने साल 2012 में इस संधि की पुष्टि की थी और 2016 तक अपनी सभी पुरानी बारूदी सुरंगों को नष्ट कर दिया था। हालांकि वर्तमान संकट को देखते हुए पोलैंड ने इन हथियारों का निर्माण फिर से शुरू करने और उन्हें तैनात करने की घोषणा की है। रूस उन लगभग तीन दर्जन देशों में से एक है जो अमेरिका के साथ मिलकर कभी भी इस अंतरराष्ट्रीय ओटावा संधि में शामिल नहीं हुए।
पड़ोसी देशों में भी चिंता
रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए भीषण हमले के बाद से पोलैंड के साथ-साथ अन्य पड़ोसी देश भी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क हैं। पिछले वर्ष वारसॉ ने फिनलैंड, एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया जैसे बाल्टिक राज्यों के साथ मिलकर संधि छोड़ने की संभावना व्यक्त की थी। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद मध्य यूरोपीय देशों में अंतरराष्ट्रीय संधियों में अपनी भागीदारी को लेकर अब एक नया मंथन शुरू हो गया है।
यूक्रेन में भारी तबाही
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2022 से जारी रूसी हमलों में अब तक 5,000 से अधिक महिलाओं की मौत हुई है। रूस ने वर्तमान में सैन्य कार्रवाई के माध्यम से यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत से अधिक महत्वपूर्ण क्षेत्र पर अपना अवैध कब्जा जमा रखा है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 30-50 लाख लोग बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बुरी तरह तरस रहे हैं।
सुरक्षा के लिए कड़ा फैसला
पोलैंड का मानना है कि रूस ने कभी भी अंतरराष्ट्रीय बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध लगाने वाली संधि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता नहीं जताई। ऐसे में अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता और नागरिकों की जान बचाने के लिए पोलैंड को अब आक्रामक रक्षात्मक कदम उठाने की सख्त जरूरत है। यह निर्णय आने वाले समय में नाटो के पूर्वी मोर्चे पर सैन्य शक्ति और रक्षात्मक तैयारियों को एक नई मजबूती प्रदान करने वाला है।
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क्षेत्रीय शांति पर प्रभाव
रूस और बेलारूस की सीमाओं पर बारूदी सुरंग बिछाने के इस फैसले से भविष्य में क्षेत्रीय कूटनीति पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ सकता है। पोलैंड ने स्पष्ट किया है कि जब तक पड़ोसी देश आक्रामक रुख रखेंगे तब तक उसे अपनी सीमाओं को अभेद्य बनाना ही होगा। आने वाले समय में पोलैंड अपनी रक्षा जरूरतों के हिसाब से नई सैन्य तकनीकों और हथियारों के आधुनिकीकरण पर निरंतर जोर देता रहेगा।
