PoK Protest: पाकिस्तान से गुस्साए नेताओं ने भारत से मांगा समर्थन, PoK प्रोटेस्ट में उमड़ी भारी भीड़
Massive PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन और दमन के खिलाफ आज बड़ा प्रदर्शन हो रहा है। नेताओं ने भारत के नागरिकों से भी इस बड़े आंदोलन में समर्थन मांगा है।
- Written By: प्रिया सिंह
PoK प्रोटेस्ट (सोर्स-सोशल मीडिया)
PoK Protest Kashmiri Leaders Seek India Support Against Pakistan Army Oppression: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बुनियादी अधिकारों को लेकर हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर सेना बहुत ही क्रूर दमन कर रही है। इसके खिलाफ वहां के संगठन जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने एक बड़ा वीडियो संदेश जारी किया है। उन्होंने इस दमनकारी नीति के खिलाफ 5 जुलाई को होने वाले बड़े विरोध प्रदर्शन में ज्यादा से ज्यादा लोगों से शामिल होने की अपील की है। साथ ही भारत के नागरिकों खासकर श्रीनगर के लोगों से भी इस आंदोलन का समर्थन करने के लिए कहा है।
सरदार अमन खान ने बताया कि कश्मीर को इस भारी दबाव और भयंकर दमन का सामना करते हुए लगभग एक पूरा महीना हो चुका है। अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने पर यहां के आम लोगों के साथ सेना का जुल्म और सैन्य आक्रामकता अपनी चरम सीमा पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इस बेहद मुश्किल दौर में लोगों के खाने-पीने की चीजों की सप्लाई और जरूरी दवाइयों के सभी रास्ते पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं। यहां के शासक और सुरक्षा बल लोगों के सांस लेने तक पर अपनी गहरी नाराजगी जता रहे हैं जिससे लोग बहुत ही ज्यादा परेशान हैं।
विपक्ष के नेताओं की एंट्री बैन
इससे पहले 30 जून को भी जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने पाकिस्तानी अधिकारियों की दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की थी। अधिकारियों ने विपक्षी नेताओं के एक राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल को जबरन PoK में प्रवेश करने से पूरी तरह से रोक दिया था। कमेटी ने इस कदम को वहां के लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक असहमति को बुरी तरह कुचलने का एक और बड़ा सबूत बताया था। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में खाद्य सामग्री की आपूर्ति को पूरी तरह से बाधित कर आम जनता तक उसकी पहुंच को सीमित कर दिया है।
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यूएन ऑफिस के बाहर बड़ा प्रदर्शन
PoK में लगातार बढ़ते इस मानवीय संकट और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ 2 जुलाई को एक बहुत ही बड़ा और उग्र प्रदर्शन हुआ था। नेशनल एंटी-टेररिज्म फ्रंट इंडिया ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के कार्यालय के बाहर यह कड़ा प्रदर्शन किया और वैश्विक हस्तक्षेप की मांग की। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी आगामी क्षेत्रीय चुनावों से पहले पाकिस्तान की ऐसी दमनकारी रणनीतियों और हथियारों के इस्तेमाल की निंदा की है। पाकिस्तान ने जेएएसी को एक ‘प्रतिबंधित संगठन’ के रूप में अवैध रूप से नामित कर के सभी मौलिक मानवाधिकारों का बहुत ही गंभीर उल्लंघन किया है।
600 से ज्यादा लोग गिरफ्तार
PoK के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा ने भी क्षेत्र में लगातार बढ़ते भारी तनाव पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर की गिरफ्तारी के बाद से वहां के हालात हर घंटे बहुत ही बदतर होते जा रहे हैं। अब तक वहां 600 से ज्यादा सामाजिक कार्यकर्ताओं और समिति के कर्मचारियों को पकड़कर सीधे जेल में डाला जा चुका है। 5 जुलाई को जिसे पाकिस्तान एकजुटता दिवस कहता था, उसे अब वहां के काले कारनामों के खिलाफ विरोध दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
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भारी विवाद की असली जड़
इस पूरे भारी विवाद की असली जड़ वहां की विधायी विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए पहले से आरक्षित 12 सीटें हैं। स्थानीय नागरिक समूहों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन 12 सीटों का दुरुपयोग करके यहां के चुनावों को अपने तरीके से प्रभावित करता है।
इसके जरिए वह अपनी कठपुतली सरकारें बनाता है और इसी राजनीतिक दखलंदाजी के खिलाफ स्थानीय अवाम ने यह बड़ा आंदोलन छेड़ रखा है। पाकिस्तानी सेना ड्रोनों से निगरानी कर रही है जिसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने 27 जुलाई के क्षेत्रीय चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का बड़ा ऐलान किया है।
