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PoK में आखिर क्यों भड़का जनता का गुस्सा? अमेरिकी रिपोर्ट ने पाकिस्तान के दावों की खोली पोल, लगाए गंभीर आरोप

PoJK Political Crisis: अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि PoK में हिंसा, विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक असंतोष पाकिस्तान की नियंत्रण व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों की कमी से जुड़े हैं।

  • Written By: अक्षय साहू
Updated On: Aug 02, 2026 | 05:13 PM

प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स- सोशल मीडिया)

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US Jacobin Report on PoK Protest: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हाल के दिनों में हुई हत्याएं और हिंसा पाकिस्तान की प्रशासनिक व्यवस्था के अचानक विफल होने का परिणाम नहीं हैं, बल्कि यह उस राजनीतिक व्यवस्था की झलक हैं जो पीओके के लोगों को अपने राजनीतिक और आर्थिक भविष्य पर सार्थक नियंत्रण से वंचित रखकर चलती है। यह दावा अमेरिका स्थित पत्रिका जैकोबिन में प्रकाशित एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीओके को आधिकारिक तौर पर राजनीतिक रूप से स्वायत्त क्षेत्र के रूप में पेश किया जाता है और इसे औपचारिक रूप से पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बताया जाता, लेकिन वास्तविकता में वहां की स्वायत्तता केवल दिखावटी है। जब भी वहां के लोग वास्तविक लोकतंत्र और अधिकारों की मांग करते हैं, तो इस्लामाबाद दमन और बल प्रयोग का सहारा लेता है।

 पीओके में चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं

रिपोर्ट में कहा गया है कि पीओके में चुनावी प्रक्रिया भी निष्पक्ष नहीं है। खासकर आरक्षित सीटों के जरिए चुनावों में हेरफेर कर इस्लामाबाद अपनी पसंद की सरकार बनवाता है। वहां की सरकार स्थानीय जनता की बजाय पाकिस्तान के इशारों पर काम करती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीओके में इस समय पिछले कई दशकों का सबसे बड़ा जनआंदोलन चल रहा है। विरोध प्रदर्शन 5 जून से शुरू हुए थे और लगातार तेज होते गए। पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और मोबाइल संचार भी निलंबित कर दिया गया।

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प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आंदोलन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की, जिसमें 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। उनका यह भी दावा है कि वास्तविक मृतकों की संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकती है।

बुनियादी जरूरतों के लिए प्रदर्शन कर रहे लोग

रिपोर्ट के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों की तत्काल वजह बिजली की बढ़ती दरें, ईंधन की महंगाई, महंगाई और गिरता जीवन स्तर था, लेकिन इसके पीछे गहरी राजनीतिक और आर्थिक असंतुष्टि है। रिपोर्ट का कहना है कि पीओके के लोगों को उन नीतियों का बोझ उठाना पड़ता है, जिनके निर्माण में उनकी कोई वास्तविक लोकतांत्रिक भागीदारी नहीं होती। रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही वहां का प्रशासन स्थानीय दिखाई देता हो, लेकिन उसके सभी महत्वपूर्ण निर्णयों का अंतिम अधिकार इस्लामाबाद के पास है। इसी कारण आर्थिक शोषण और राजनीतिक अधीनता एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।

पाकिस्तान का शासक वर्ग केवल किसी एक सरकार या प्रशासनिक संस्था की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि ऐसी पूरी व्यवस्था को बचाने में लगा है जिसकी स्थिरता इस बात पर निर्भर करती है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने राजनीतिक और आर्थिक भविष्य पर प्रभावी नियंत्रण न मिले। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की संघीय सरकार और सेना के प्रभाव में काम कर रहे पीओके के स्थानीय प्रशासन ने जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी की प्रमुख मांगों को पूरा नहीं किया, जिससे जनता में असंतोष और बढ़ गया।

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इस्लामाबाद के दावों पर उठे सवाल

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा नागरिकों पर की गई कार्रवाई ने इस्लामाबाद के उस लंबे समय से चले आ रहे दावे पर भी सवाल खड़े किए हैं, जिसमें वह खुद को कश्मीरी मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी बताता रहा है। रिपोर्ट का कहना है कि कश्मीर मुद्दे का समर्थक होने का दावा करने वाला पाकिस्तान, उसी क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई नागरिकों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

एजेंसी इनपुट के साथ-

Pok protest jacobin report exposes political and economic crisis

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Published On: Aug 02, 2026 | 05:13 PM

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