Panama Canal Crisis: होर्मुज का मसला सुलझा तो अब पनामा नहर पर मंडराया अल नीनो का खतरा
Panama Canal Crisis: अमेरिका-ईरान डील से होर्मुज का तनाव कम हुआ, पर पनामा नहर पर अल नीनो का खतरा मंडरा रहा है। सूखे से नहर का जल स्तर गिरा है जिससे दुनिया भर का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा।
- Written By: प्रिया सिंह
पनामा नहर (सोर्स-सोशल मीडिया)
Panama Canal Crisis News Update: अमेरिका-ईरान डील होने के बाद महीनों से बंद पड़े होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तनाव कम हो गया है। लेकिन समुद्री व्यापार के अहम रास्ते पनामा नहर पर अल नीनो का खतरा मंडराने लगा है। NOAA के मुताबिक 2026 के आखिर तक यह मौसमी घटना बहुत ज्यादा शक्तिशाली हो सकती है।
साल 2023-24 के अल नीनो की वजह से गैटुन झील में पानी का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिर गया है। यह झील पनामा नहर के लॉक सिस्टम को चलाने के लिए जरूरी मीठा पानी सप्लाई करने का अहम काम करती है। जल स्तर घटने से पनामा नहर अथॉरिटी ने रोजाना गुजरने वाले जहाजों की संख्या कम कर दी है।
49.5 फीट तक घटेगा जहाजों का ड्राफ्ट
पनामा नहर अथॉरिटी ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 3 जुलाई से नया नियम लागू किया जाएगा। इसके तहत नियो-पनामैक्स जहाजों के लिए अधिकतम पानी की गहराई 49.5 फीट कर दी जाएगी। अमेरिका से ऊर्जा का रिकॉर्ड निर्यात उपलब्ध स्लॉट पर भारी दबाव बढ़ा रहा है, जिससे गुजरने की प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
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अल नीनो के हावी होने की 88 प्रतिशत संभावना
मौसम विभाग के अनुसार नवंबर और जनवरी के बीच अल नीनो के मजबूत होने की 88 प्रतिशत संभावना है। इसके बहुत मजबूत होने की 63 प्रतिशत भारी संभावना है जो 1997-98 और 2015-16 जैसी होगी। पिछले सूखे के दौरान ट्रैफिक सामान्य स्तर से 40 प्रतिशत तक कम हो गया था और सप्लाई चेन पर असर पड़ा था।
भारत के मानसूनी बारिश पर भी पड़ेगा असर
अल नीनो का यह विनाशकारी असर सिर्फ पनामा नहर तक ही सीमित नहीं है बल्कि भारत तक पहुंचेगा। भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश के पैटर्न में बदलाव से मानसून पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इसके चलते भारत में खेती के उत्पादन और अनाज के निर्यात पर भी सीधा और बहुत गहरा असर पड़ सकता है।
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2027 तक माल ढुलाई लागत पर भारी असर
राहत की बात यह है कि अल नीनो अटलांटिक में बड़े तूफानों की संभावना को कुछ कम कर देता है। लेकिन अगर NOAA का अनुमान सही साबित हुआ तो पनामा नहर दुनिया का सबसे कमजोर समुद्री चोकपॉइंट बन जाएगी। इसका सीधा असर 2027 तक माल ढुलाई की लागत, एनर्जी मार्केट और ग्लोबल व्यापार पर जरूर पड़ेगा।
