

Pakistan Rain Floods Death Toll: पाकिस्तान में मानसून की मूसलाधार बारिश अब जानलेवा साबित हो रही है। देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांतों में भारी बरसात, मकान गिरने और अचानक आई बाढ़ के कारण पिछले कुछ दिनों में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई है। बुधवार, 22 जुलाई को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, मरने वालों में बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
पंजाब प्रांत के गुजरांवाला, नारोवाल, पाकपत्तन और लाहौर शहरों में बारिश ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया है। अकेले गुजरांवाला शहर में ही 6 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं। यहां करीब 10 घंटे तक हुई निरंतर बारिश के बाद मुख्य सड़कें और रिहाइशी इलाके पानी में डूब गए।
गुजरांवाला में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जीटी रोड पर मेट्रो बस मार्ग निर्माण के लिए चल रही खुदाई के कारण सड़कों पर जलभराव और कीचड़ बढ़ गया, जिससे सामान्य जनजीवन और व्यावसायिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं।
मौतों का मुख्य कारण जर्जर मकानों की छत और दीवारें गिरना बताया जा रहा है। पाकपत्तन में एक घर की छत गिरने से दो नाबालिग बच्चों की जान चली गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गईं। वहीं लाहौर के गुलशन-ए-रावी इलाके में एक फैक्ट्री की छत गिरने से चार मजदूर मलबे में दबकर घायल हो गए।
वहीं, पंजाब के अलावा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। सोमवार को खैबर, मर्दान और बाजौर जिलों में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) के कारण 9 लोगों की मौत हो गई।, बाढ़ के कारण मानसेहरा, एबटाबाद, चित्राल और शांगला जैसे जिलों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
यहां पुल, सड़कें, बिजली के खंभे और संचार सेवाएं पूरी तरह बाधित हो गई हैं। खैबर जिले में बाढ़ के पानी में फंसे एक व्यक्ति का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जो मदद के लिए गुहार लगा रहा था, लेकिन पानी के तेज बहाव में वह बह गया।
इतना ही नहीं, बाढ़ का असर पाकिस्तान-अफगानिस्तान राजमार्ग पर भी पड़ा है। नौ अलग-अलग स्थानों पर सड़क के जलमग्न होने के कारण यह मार्ग कई घंटों तक बंद रहा। लांडी कोटल इलाके में अफगान नागरिकों को ले जा रहा एक वाहन बाढ़ की चपेट में आ गया, हालांकि स्थानीय लोगों ने समय रहते मशक्कत कर उसमें सवार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया।
बारिश के कारण मछली फार्मों, बागानों और फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को करारा झटका लगा है।