‘मान न मान, मैं मेजबान’; ईरान-US जंग रोकने के लिए कूद पड़ा पाकिस्तान, ‘चौधरी’ बनने की फिराक में शहबाज
Pakistan Mediates Iran US Conflict Talks: पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है।
- Written By: अमन उपाध्याय
शहबाज़ शरीफ़ और डोनाल्ड ट्रम्प, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Shehbaz Sharif Offers To Host Iran US Talks: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को एक ‘शांतिदूत’ के रूप में पेश करने की कोशिश शुरू कर दी है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में जंग खत्म करने के सभी प्रयासों का स्वागत करता है और इसमें पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
शरीफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत होते हैं तो पाकिस्तान सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी करने को अपने लिए सम्मान की बात मानेगा।
ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर चर्चा
मध्यस्थता की इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए शहबाज शरीफ ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में जारी शत्रुता पर गंभीर चिंता व्यक्त की और जोर दिया कि सभी पड़ोसी देशों को संवाद और कूटनीति की ओर लौटना चाहिए। पाकिस्तान उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से राजनयिक वार्ता की पैरवी कर रहे हैं। इसी बीच यह भी खबर मिली थी कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख CDS आसिम मुनीर ने रविवार को राष्ट्रपति ट्रंप से बात की।
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ट्रंप का दावा और ईरान का रुख
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके दूत एक ‘सम्मानित ईरानी नेता’ के साथ बातचीत कर रहे हैं। ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमलों को 5 दिनों के लिए टालने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की समयसीमा बढ़ाने का भी ऐलान किया है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने किसी भी गुप्त वार्ता से इनकार करते हुए कहा है कि ट्रंप ने ईरान की चेतावनी के बाद पीछे हटने का फैसला किया है।
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भारत में सियासी घमासान
पाकिस्तान के मध्यस्थ के रूप में उभरने की खबरों ने भारत में राजनीतिक पारा गरमा दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत इस भूमिका में उपेक्षित हो गया है जबकि उसे यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। विपक्ष का आरोप है कि युद्ध से ठीक पहले पीएम मोदी की इजराइल यात्रा के कारण भारत मध्यस्थता की स्थिति से बाहर हो गया है।
