पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (सोर्स- सोशल मीडिया)
Karachi Protests After Khamenei Death: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत ने पूरे मिडिल ईस्ट के साथ-साथ पड़ोसी देश पाकिस्तान को भी दहला कर रख दिया है। जहां एक तरफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ईरान के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं उनके अपने देश में अराजकता का माहौल है। कराची की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई ने सरकार के संवेदनशील चेहरे के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है। अपनों के खून से सनी सड़कों के बीच सरकार का विदेशी शोक मनाना अब जनता के बीच तीखी आलोचना और भारी गुस्से का विषय बन गया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान की सरकार और यहां के लोग इस कठिन समय में ईरान के साथ खड़े हैं और इसे एक अपूरणीय क्षति मानते हैं। लेकिन सरकार का यह दुख महज एक कूटनीतिक दिखावा नजर आ रहा है क्योंकि देश के भीतर सुरक्षा के हालात बेहद भयावह और बेकाबू हो चुके हैं।
खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही पाकिस्तान के कई शहरों में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। कराची में गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास को फूंकने की कोशिश की, जिसे बलपूर्वक रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने सीधी फायरिंग कर दी। इस दौरान हुई भीषण गोलीबारी में 22 पाकिस्तानी नागरिकों की जान चली गई, जो सरकार की अपनी जनता के प्रति संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर तो बड़ी चिंता जताई है और इसे राष्ट्र प्रमुखों को निशाना बनाने की गलत परंपरा कहा है। वे दुनिया के मंच पर नैतिकता की बातें कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में वे अपने ही देश के नागरिकों की रक्षा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। कराची की सड़कों पर गिरी लाशों ने यह साबित कर दिया है कि सरकार का ध्यान बाहरी संबंधों पर अधिक है और उसे अपनी जनता की जान की कोई फिक्र नहीं है।
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई है जिसने अब पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में धकेल दिया है। ईरान ने जहां 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है, वहीं पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है जिसे संभालना अब मुश्किल होता जा रहा है। 22 निर्दोष लोगों की मौत ने पाकिस्तानी जनता के गुस्से को और भड़का दिया है जो अब अपनी ही सरकार को हत्यारा और संवेदनहीन बताकर विरोध कर रहे हैं।
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एक तरफ पाकिस्तान सरकार ईरान के लोगों के लिए ‘सब्र’ और ‘ताकत’ की दुआएं मांग रही है, तो दूसरी तरफ खुद कराची में मातम पसरा हुआ है। यह एक बड़ी विडंबना है कि जो सरकार दूसरों के जख्मों पर मरहम लगाने का दावा करती है, वही आज अपने ही नागरिकों के खून की जिम्मेदार बनी हुई है। पाकिस्तान की आम जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या उनकी जान की कीमत अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सामने बिल्कुल शून्य और मामूली हो गई है।