शहबाज शरीफ और मोहम्मद बिन सलमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan Military Deployment Saudi Arabia Iran US Peace Talks: मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी महायुद्ध के बीच पाकिस्तान के एक नए सैन्य कदम ने दुनिया को चौंका दिया है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने रक्षा सहयोग को विस्तार देते हुए वहां अपनी सेना की तैनाती शुरू कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि यह तैनाती ऐसे समय में की गई है जब ईरान का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ युद्धविराम (Ceasefire) पर चर्चा करने के लिए इस्लामाबाद में ही मौजूद है।
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के जवान, जिनमें लड़ाकू और सहायक विमानों का दस्ता भी शामिल है, शनिवार को किंग अब्दुलअजीज एयर बेस (King Abdulaziz Air Base) पहुंच गए हैं।
यह वही एयर बेस है जिस पर हाल के महीनों में ईरान के साथ जारी संघर्ष के दौरान कई बार ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए थे। पाकिस्तान की ओर से इस सैन्य तैनाती का प्राथमिक उद्देश्य सऊदी अरब की रक्षा क्षमताओं को मजबूती देना और क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग करना बताया गया है।
एक तरफ जहां पाकिस्तान के किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमान उतर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ इस्लामाबाद में कूटनीतिक मेज सजी हुई है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागैर गालिबफ के नेतृत्व में एक ईरानी डेलिगेशन शनिवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करने पहुंचा।
हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बैठक के विवरण पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें अमेरिका-ईरान सीजफायर पर गंभीर चर्चा हुई है। पाकिस्तान के इस रुख ने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच ‘डबल गेम’ की आशंकाओं को जन्म दे दिया है क्योंकि वह एक तरफ ईरान से शांति की बात कर रहा है और दूसरी तरफ उसके प्रतिद्वंद्वी सऊदी अरब में सेना भेज रहा है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा संबंधों की यह मजबूती पिछले साल सितंबर में हुए एक महत्वपूर्ण समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत यह तय किया गया था कि किसी भी एक देश पर होने वाला सैन्य हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में ईरान द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों में अमेरिकी सैनिक भी घायल हुए थे जिसके बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को फोन कर पूर्ण सैन्य सहयोग का आश्वासन दिया था।
इस्लामाबाद में हो रही इस गुप्त और अहम वार्ता में केवल ईरान और अमेरिका ही शामिल नहीं हैं। क्षेत्रीय सूत्रों के मुताबिक, मिस्र, सऊदी अरब, चीन और कतर के वरिष्ठ अधिकारी भी पाकिस्तान में मौजूद हैं और परोक्ष रूप से मध्यस्थता (Mediation) कर रहे हैं।
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इन वार्ताओं का उद्देश्य क्षेत्र में जारी भीषण रक्तपात को रोकना है, लेकिन पाकिस्तान की सक्रिय सैन्य भागीदारी ने इस कूटनीतिक संतुलन को और भी जटिल बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पाकिस्तान की यह ‘दोहरी नीति’ क्षेत्र में शांति लाएगी या तनाव को और बढ़ाएगी।