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पाकिस्तान में ‘Honor Killing’ का बढ़ता संकट और न्याय में विफलता: रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Pakistan Human Rights: पाकिस्तान में 'ऑनर किलिंग' गंभीर मानवाधिकार मुद्दा है। SSDO की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 225 मामलों में सिर्फ दो में सजा हुई, जो न्याय प्रणाली की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

  • Written By: प्रिया सिंह
Updated On: Feb 17, 2026 | 07:32 AM

पाकिस्तान में ‘Honor Killing’ का बढ़ता संकट (सोर्स-सोशल मीडिया)

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Honor Killing Conviction Rate Pakistan: पाकिस्तान में ‘ऑनर किलिंग’ की बढ़ती घटनाएं वर्तमान में एक अत्यंत गंभीर मानवाधिकार संकट बन चुकी हैं और यह लगातार जारी हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में इन हत्याओं की संख्या तो बहुत अधिक है, लेकिन अपराधियों को सजा मिलने की दर चिंताजनक रूप से कम है। व्यक्तिगत त्रासदियों से परे, यह मुद्दा एक भयावह राष्ट्रीय तस्वीर पेश करता है जिसमें न्याय की उम्मीदें लगातार बहुत धूमिल होती दिख रही हैं। परिवारों द्वारा किए जाने वाले समझौते और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अत्यधिक देरी इस मानवीय समस्या को और भी अधिक जटिल बना रही है।

रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े

सतत सामाजिक विकास संगठन (SSDO) की हालिया रिसर्च रिपोर्ट आधिकारिक रिकॉर्ड और कई अंतरराष्ट्रीय शोधों के आंकड़ों पर आधारित है। इस रिपोर्ट के अनुसार, कानून होने के बावजूद कमजोर जांच और सामाजिक दबाव न्याय की राह में आज भी सबसे बड़ी बाधा बने हुए हैं। पंजाब प्रांत में सबसे अधिक 225 ऑनर किलिंग के मामले दर्ज हुए, लेकिन उनमें से केवल दो ही मामलों में अपराधियों को सजा सुनाई गई।

विभिन्न प्रांतों की दयनीय स्थिति

खैबर पख्तूनख्वा में कुल 134 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से केवल दो ही मामलों में अपराधियों की दोषसिद्धि संभव हो सकी है। सिंध प्रांत में भी कई घटनाएं दर्ज की गईं, लेकिन वहां किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिल पाई जो काफी डरावना है। बलूचिस्तान में 32 मामले सामने आए, जिनमें से केवल एक में सजा हुई, जो न्याय मिलने और जान गंवाने वालों के बीच बड़े अंतर को दर्शाता है।

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महिलाओं पर केंद्रित हिंसा

सामाजिक कार्यकर्ता इमरान टक्कर के अनुसार, पाकिस्तान में ऑनर किलिंग की शिकार होने वाले करीब 90 प्रतिशत लोग केवल महिलाएं ही होती हैं। समाज में महिलाओं को पहले से ही एक कमजोर और उत्पीड़ित वर्ग माना जाता है, जिससे उनके खिलाफ हिंसा करना बहुत आसान हो जाता है। कई मामलों में पीड़ित का अपना परिवार ही न्याय की मांग से पीछे हट जाता है, जिससे अपराधी बिना किसी सजा के आसानी से बच निकलते हैं।

पुलिस जांच की बड़ी खामियां

वरिष्ठ अधिवक्ता शब्बीर हुसैन गिगयानी ने बताया कि पुलिस की कमजोर जांच और खराब केस निर्माण न्याय मिलने में आज सबसे बड़ी बाधा है। अक्सर पुलिस पीड़ित के करीबी रिश्तेदारों को ही मुख्य गवाह बना देती है, जो बाद में आरोपियों से समझौता कर अदालत में मुकर जाते हैं। गवाहों के अदालत में बयान बदल देने के कारण लगभग 80 प्रतिशत मामलों में आरोपी कानूनी खामियों की वजह से आसानी से बरी हो जाते हैं।

सामाजिक जड़ों में छिपी हिंसा

SSDO के कार्यकारी निदेशक सैयद कौसर अब्बास के अनुसार, बेहद कम दोषसिद्धि दर यह दर्शाती है कि मौजूदा व्यवस्था पीड़ितों की सुरक्षा में विफल है। ऑनर किलिंग की जड़ें उन गहराई से जमी सामाजिक परंपराओं में हैं, जहां हिंसा के जरिए लोगों की आवाज को हमेशा के लिए चुप कराया जाता है। सख्त कानून लागू न होने के कारण इन हत्याओं को ‘नैतिक सुधार’ के रूप में समाज में अनुचित रूप से उचित ठहराने की कोशिश की जाती है।

यह भी पढ़ें: आसिम से लेंगे आजादी…शहबाज से लेंगे आजादी, इस्लामाबाद से रावलपिंडी तक बवाल, इमरान समर्थकों ने किया विद्रोह

तत्काल सुधारों की आवश्यकता

रिपोर्ट में पुलिस जांच को मजबूत करने और कानूनी प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार करने की बहुत ही तत्काल आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया है। अपराधियों को जवाबदेह बनाने के लिए त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना और अभियोजन पक्ष को प्रभावी बनाना अब देश के लिए अनिवार्य हो गया है। जब तक व्यवस्था में बुनियादी बदलाव नहीं होंगे, तब तक सम्मान के नाम पर होने वाली ये निर्दोष हत्याएं रुकना समाज में नामुमकिन बना रहेगा।

Pakistan honor killing human rights crisis low conviction rate report 2024

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Published On: Feb 17, 2026 | 07:32 AM

Topics:  

  • Human Rights Violation
  • Pakistan
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