

Pakistan Floods News In Hindi: पाकिस्तान का पंजाब प्रांत इस समय कुदरत के कहर और कूटनीतिक बदलावों की दोहरी मार झेल रहा है। शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चेनाब नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मची है।
लियाकतपुर के 'बेट परारा' इलाके में नदी का सुरक्षात्मक तटबंध टूटने से दर्जनों गांव जलमग्न हो गए हैं और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
चेनाब नदी के उग्र रूप के कारण लियाकतपुर के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, तटबंध टूटने के बाद पानी रिहायशी इलाकों और खेतों में तेजी से फैल गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया है, लेकिन पानी का बहाव इतना तेज है कि बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इस जल प्रलय के पीछे भारत में हो रही लगातार भारी बारिश को मुख्य कारण बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 6 दिनों के भीतर भारत ने चेनाब नदी के जरिए लगभग 19 करोड़ क्यूसेक पानी पाकिस्तान की ओर प्रवाहित किया है। जम्मू और उसके ऊपरी कैचमेंट क्षेत्रों में मॉनसून की सक्रियता के कारण बांधों और बैराजों में जलस्तर बढ़ गया, जिससे अतिरिक्त पानी छोड़ना भारत की मजबूरी बन गया था।
भारत की सख्ती इस बार पाकिस्तान के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो गई है क्योंकि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद इंडस वॉटर ट्रीटी को स्थगित कर दिया है। पहले इस संधि के तहत भारत को पश्चिमी नदियों में पानी छोड़ने से पहले पाकिस्तान को अग्रिम सूचना देनी होती थी, ताकि वह बाढ़ की तैयारी कर सके। हालांकि, संधि के निलंबन के बाद अब भारत किसी भी प्रकार की अग्रिम जानकारी साझा करने के लिए बाध्य नहीं है।
भारत ने पाकिस्तान के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें इसे 'जानबूझकर' लाई गई बाढ़ कहा गया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से प्राकृतिक परिस्थितियों और भारी बारिश का नतीजा है।
इसके साथ ही भारत ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर किसी भी प्रकार का अमल या सहयोग संभव नहीं होगा। भारत का रुख साफ है कि मानवीय आधार पर केवल बुनियादी जानकारी ही साझा की जाएगी, लेकिन औपचारिक संधि का लाभ तब तक नहीं मिलेगा जब तक आतंकवाद नहीं रुकता।