राष्ट्रपति पुतिन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran US Peace Talks Latest Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध को रुकवाने की कोशिशों में एक बड़ा कूटनीतिक बदलाव आया है। पिछले एक हफ्ते से मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा पाकिस्तान इस समझौते को कराने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। अब दुनिया की नजरें रूस पर टिकी हैं क्योंकि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इस शांति समझौते की कमान संभाल ली है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान पिछले एक हफ्ते से दोनों देशों के बीच संदेशवाहक बना हुआ था लेकिन वह एक भी बैठक आयोजित कराने में सफल नहीं रहा। इसकी विफलता के पीछे दो मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
प्रमुख कड़ी पर हमला: पाकिस्तान जिस नेता (कमल खराजी) के जरिए ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई तक संदेश पहुंचा रहा था, उन पर 1 अप्रैल को अमेरिकी स्ट्राइक हो गई जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
भरोसे की कमी: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें अमेरिका की गंभीरता पर भरोसा नहीं है। पाकिस्तान ईरान को यह विश्वास दिलाने में नाकाम रहा कि अमेरिका हमले रोक देगा।
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अब इस मामले में सीधी एंट्री ली है। पुतिन के प्रेस सेक्रेटरी दमित्री पेस्कोव ने कहा है कि मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए राष्ट्रपति खुद सक्रिय होकर योजना पर काम कर रहे हैं। इसी मिशन के तहत गुरुवार (2 अप्रैल) को पुतिन ने मिस्र के विदेश मंत्री से मुलाकात की और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) से फोन पर विस्तृत चर्चा की है।
पुतिन का मानना है कि रूस वैश्विक रसद (Logistics) और व्यापार संरचना को नया रूप देने के लिए समाधान पेश कर सकता है, जिससे तनाव कम हो सके। रूसी खुफिया एजेंसी के प्रमुख सर्गेई नारिशकिन भी इस मामले में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लगातार संपर्क में हैं।
शांति की इन कोशिशों के बीच जमीन पर तनाव कम नहीं हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश को संबोधित करते हुए संकेत दिया है कि यह युद्ध अभी 2 से 3 हफ्ते और खिंच सकता है। दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम लीडर ने किसी भी समझौते से इनकार करते हुए लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया है।
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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पुतिन का प्रभाव ट्रंप और ईरानी नेतृत्व को बातचीत की मेज पर लाने में सफल होता है, या यह युद्ध और अधिक विनाशकारी रूप अख्तियार करेगा।