पाकिस्तानी मौलाना फजलुर रहमान की Pakistan Army Chief मुनीर को चुनौती, कहा वर्दी उतारकर लड़ें चुनाव
Pakistan Army Chief: पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। मौलाना फजलुर रहमान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को वर्दी उतारकर चुनाव लड़ने की सीधी चुनौती दी है, जिससे भारी कूटनीतिक तनाव है।
- Written By: प्रिया सिंह
मौलाना फजलुर रहमान और सेना प्रमुख आसिम मुनीर (सोर्स-सोशल मीडिया )
Fazlur Rahman Challenge To Pakistan Army Chief: पाकिस्तान की राजनीति में सेना के लगातार बढ़ते दखल को लेकर एक बार फिर से बहुत बड़ा और भारी विवाद खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (फजल) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सेना को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर राजनीति ही करनी है तो वर्दी उतारकर चुनाव मैदान में आइए। इससे पता चल जाएगा कि पाकिस्तान में वर्दी वालों को कितने वोट मिलते हैं।
यह पहला मौका है जब पाकिस्तान में किसी इतने बड़े इस्लामी नेता ने सेना के राजनीतिक दखल की इतनी मुखर और कड़ी आलोचना की है। मौलाना फजलुर रहमान का यह बयान पाकिस्तान की सेना के प्रभाव पर अब तक की सबसे खुली और बड़ी चुनौती माना जा रहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब देश पहले से ही भारी राजनीतिक अस्थिरता, बलूचिस्तान के गंभीर विद्रोह और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस टकराव से पाकिस्तान में नया बवाल मच गया है।
इमरान सरकार गिराने में निभाई थी भूमिका
दिलचस्प बात यह है कि मौलाना फजलुर रहमान कभी उन बड़े नेताओं में प्रमुख रूप से शामिल थे जिन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की सत्ता छीनी थी। साल 2022 में इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को पूरी तरह सफल बनाने में उनकी बहुत ही अहम भूमिका रही थी। उसी बड़े राजनीतिक बदलाव के ठीक बाद जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के नए और ताकतवर सेना प्रमुख बने थे। लेकिन बदलते समय और हालात के साथ अब इन दोनों बड़े नेताओं के रिश्ते पूरी तरह से बिगड़ चुके हैं।
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सेना पर लगाए बहुत गंभीर आरोप
अब फजलुर रहमान लगातार पाकिस्तान की सेना पर देश की राजनीति में अनावश्यक दखल देने का बहुत ही गंभीर आरोप लगा रहे हैं। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि सेना की इसी मनमानी की वजह से बलूचिस्तान में हालात लगातार बहुत ज्यादा बिगड़ते जा रहे हैं। इसके साथ ही सेना देश की सभी महत्वपूर्ण और अहम लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी पूरी तरह से कमजोर करने का काम कर रही है। इन गंभीर आरोपों ने देश की राजनीति में एक नए और बड़े समीकरण को जन्म दे दिया है।
कौन हैं मौलाना फजलुर रहमान
मौलाना फजलुर रहमान का जन्म 19 जून 1953 को पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान इलाके में हुआ था। वह मशहूर देवबंदी धर्मगुरु और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती महमूद के बेटे हैं। अपने पिता की मौत के बाद साल 1980 में उन्होंने जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी की कमान अपने हाथों में संभाली थी। बाद में पार्टी दो हिस्सों में बंट गई और उन्होंने जेयूआई-एफ का नेतृत्व किया और साल 1988 में पहली बार संसद के लिए चुने गए।
तालिबान के रहे हैं बड़े समर्थक
फजलुर रहमान को बहुत लंबे समय से अफगान तालिबान का एक मजबूत और बहुत बड़ा समर्थक माना जाता है। साल 2001 में अफगानिस्तान पर अमेरिकी हमले का उन्होंने भारी विरोध किया और तालिबान के समर्थन में कई रैलियां निकालीं। साल 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान सरकार को मान्यता देने की बड़ी मांग की थी। उनकी पार्टी के मदरसों से तालिबान के कई बड़े नेताओं ने शिक्षा भी हासिल की है।
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शरिया कानून पर मौलाना का रुख
मौलाना फजलुर रहमान हमेशा से पाकिस्तान में पूरी तरह शरिया कानून लागू करने के बहुत बड़े पक्षधर रहे हैं। लेकिन उनका स्पष्ट कहना है कि हथियारों और हिंसा के बल पर शरिया लागू करना पूरी तरह से इस्लाम के खिलाफ है। इसी वजह से वह टीटीपी के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई की बजाय हमेशा शांतिपूर्ण बातचीत की वकालत करते रहे हैं। सेना और इस्लामी नेता के बीच का यह भयंकर टकराव देश के भविष्य के लिए बहुत खतरनाक हो सकता है।
