तुर्की ने खुद को पाकिस्तान-अफगानिस्तान मध्यस्थता से बाहर किया (सोर्स- सोशल मीडिया)
Turkey Back Out Pakistan-Afghanistan Mediation: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध पिछले एक साल गंभीर तनावपूर्ण चल रहे है। हालात इस हद तक बिगड़ गए कि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई और सीमा पार हमलों के आरोप लगाए। जब यह तनाव संभावित युद्ध जैसी स्थिति में बदलने लगा, तब मध्य पूर्व के कई देशों ने हस्तक्षेप कर मध्यस्थता की कोशिश की। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी।
इस पूरी प्रक्रिया में तुर्की प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, जबकि कतर और सऊदी अरब भी बातचीत में शामिल थे। लेकिन अब तुर्की ने आधिकारिक रूप से इस मध्यस्थता से खुद को अलग कर लिया है। शीर्ष सुरक्षा और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, बार-बार बातचीत के बावजूद इस्लामाबाद और अफगान तालिबान के बीच मौजूद गहरे मतभेद दूर नहीं हो सके। तुर्की अधिकारियों ने पाकिस्तान को सूचित किया है कि अफगान तालिबान, पाकिस्तान की बुनियादी सुरक्षा मांगों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।
शांति वार्ता फेल होने के पीछे सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की सख्त शर्तों को माना जा रहा है। इनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों को सौंपना, डूरंड लाइन के साथ पांच किलोमीटर का बफर जोन बनाना, अफगान ट्रांजिट ट्रेड और माल की आवाजाही पर कड़ी निगरानी, काबुल द्वारा पाकिस्तान की सुरक्षा प्राथमिकताओं को मान्यता देना और पाकिस्तान में रह रहे अफगान शरणार्थियों की तत्काल वापसी शामिल हैं। अफगान प्रशासन ने इन सभी मांगों को खारिज करते हुए इन्हें अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार दिया है।
जानकारी के मुताबिक, अफगान तालिबान ने तुर्की, कतर और सऊदी अरब को स्पष्ट रूप से बता दिया है कि वे किसी भी दबाव आधारित समझौते को स्वीकार नहीं करेंगे। इस बीच, मध्यस्थ देशों के बीच भी मतभेद उभर आए हैं। पाकिस्तान के कुछ वरिष्ठ राजनयिकों ने कतर पर अफगान तालिबान के प्रति झुकाव का आरोप लगाया है, जिससे इस्लामाबाद में अविश्वास बढ़ा है।
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इसी दौरान पाकिस्तान ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद ने चेतावनी दी है कि अफगान धरती से होने वाले किसी भी बड़े आतंकी हमले की पूरी जिम्मेदारी अफगानिस्तान की होगी। पाकिस्तान ने यह भी दोहराया है कि वह अपने नागरिकों, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा, और जरूरत पड़ने पर अफगानिस्तान के भीतर कार्रवाई के लिए भी तैयार है।