

Iran Pakistan Relations: मध्य पूर्व में युद्ध के बढ़ते बादलों और इजरायल-अमेरिका के साथ जारी भारी तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान की सरकार और वहां की जनता का आभार व्यक्त किया है। ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह पश्चिमी देशों और 'जायोनी शासन' की ओर से बढ़ते सैन्य दबाव का सामना कर रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विशेष संदेश साझा करते हुए पाकिस्तान के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की है। उन्होंने इन 'पावन और आध्यात्मिक' दिनों में ईरान के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व की सराहना की। अराघची के अनुसार, पाकिस्तान ने न केवल राजनीतिक समर्थन दिया है बल्कि अमेरिकी और इजरायली आक्रामकता के खिलाफ खुलकर अपनी आवाज बुलंद की है।
ईरान की इस कृतज्ञता का असर केवल बयानों तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके व्यावहारिक और सामरिक संकेत भी मिलने शुरू हो गए हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सामरिक रूप से अत्यंत संवेदनशील 'स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज' से पाकिस्तान के व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकलने की अनुमति दे दी है। यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान ने इस जलडमरूमध्य में कई अन्य देशों के जहाजों के लिए प्रतिबंधात्मक रुख अपना रखा है। पाकिस्तान को मिली यह छूट दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी और क्षेत्रीय राजनीति में बदलते समीकरणों की ओर इशारा करती है।
ईरान ने इस मौके पर दुनिया को यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। तेहरान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह अल्लाह पर पूर्ण विश्वास रखते हुए किसी भी बाहरी हमले या दबाव का सामना करने के लिए तैयार है। ईरान ने यह भी साफ किया कि उसकी सेनाएं अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए हर समय सतर्क हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह कदम दक्षिण एशिया में पाकिस्तान की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। जहां एक ओर ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने की कोशिशों का सामना कर रहा है, वहीं पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश से मिला यह खुला समर्थन उसके लिए बड़ी राहत है। हालांकि, इसके साथ ही पाकिस्तान के लिए अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल, ईरान और पाकिस्तान के बीच यह 'नई एकजुटता' मिडिल ईस्ट के भविष्य के संघर्षों में एक निर्णायक फैक्टर साबित हो सकती है।